

Key Highlights Mpc 2025 : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) ने अगस्त 2025 की बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) को 5.5% पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला जून 2025 में किए गए 50 बेसिस प्वाइंट की बड़ी कटौती के बाद लिया गया है। इस निर्णय को समिति के सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
रेपो रेट स्थिर, पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’
रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखा गया है। वहीं, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तथा बैंक रेट 5.75% पर बरकरार हैं।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने कहा कि भारतीय नागरिकों के हित और कल्याण को सर्वोपरि रखा गया है। RBI ने अपना पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।
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जीडीपी ग्रोथ आउटलुक (Key Highlights Mpc 2025)
MPC ने भारत की GDP ग्रोथ (GDP Growth Forecast 2025-26) को 2025-26 के लिए 6.5% पर बनाए रखा है।
वित्त वर्ष 2025-26 के तिमाही अनुमान इस प्रकार हैं :
- Q1 : 6.5%
- Q2 : 6.7%
- Q3 : 6.6%
- Q4 : 6.3%
इसके अलावा, FY27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के लिए RBI ने 6.6% की विकास दर का अनुमान जताया है।
मुद्रास्फीति (Inflation Outlook) : CPI घटा, लेकिन खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका
जून 2025 में हेडलाइन सीपीआई (Consumer Price Index – CPI Inflation India 2025) घटकर 2.1% हो गई है, जो 77 महीनों में सबसे कम है। इसका मुख्य कारण कृषि गतिविधियों में सुधार और आपूर्ति-आधारित उपाय रहे।
RBI ने FY26 के लिए CPI को घटाकर 3.1% कर दिया है, जो पहले 3.7% अनुमानित था। Q1 FY27 में CPI बढ़कर 4.9% होने का अनुमान है।
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तिमाही आधारित CPI अनुमान (Key Highlights Mpc 2025)
- Q2 FY26 : 2.1% (पहले 3.4%)
- Q3 FY26 : 3.1% (पहले 3.9%)
- Q4 FY26 : 4.4% (पूर्ववत)
कोर इंफ्लेशन (Core Inflation) जून में बढ़कर 4.4% हो गया, जो गोल्ड की कीमतों में वृद्धि का असर बताया गया है। हालांकि फ्यूल इंफ्लेशन में डिफ्लेशन बना हुआ है।
वैश्विक जोखिम और ट्रंप टैरिफ का असर
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की ओर से भारतीय आयात पर 25% टैरिफ (Trump Tariff Threats) लगाने की घोषणा की गई है, जो 7 अगस्त से प्रभावी होगी। इससे भारत के वैश्विक व्यापार और मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर असर पड़ सकता है। RBI ने चेताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में 10% वृद्धि हेडलाइन मुद्रास्फीति को 20 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ा सकती है।
फेस्टिव सीजन से पहले सधी हुई रणनीति
फेस्टिव सीजन से ठीक पहले रेपो रेट को स्थिर रखना एक सधी हुई रणनीति मानी जा रही है, जब देश में क्रेडिट की मांग आमतौर पर बढ़ती है। हाउसिंग, रिटेल और एमएसएमई सेक्टरों की ओर से भी ब्याज दरों में और कटौती की मांग थी, लेकिन RBI ने वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू स्थिरता को ध्यान में रखते हुए यथास्थिति बनाए रखी है।
Mpc की मुख्य बातों को देखें (Key Highlights Mpc 2025), तो RBI की अगस्त 2025 की मौद्रिक नीति में रेपो रेट को स्थिर रखकर स्पष्ट संकेत दिया गया है कि बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है। वैश्विक दबावों, ट्रेड वॉर, और घरेलू महंगाई में कमी के बीच यह निर्णय देश की अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक कदम है।



