डॉ. बृजेश सती

जब भी बात विकास की होती है, तो हमारी निगाहें अक्सर सरकार की ओर उठ जाती हैं। लेकिन कुछ युवा ऐसे भी हैं जो यह मानते हैं कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।
उत्तराखंड के पवित्र तीर्थस्थल बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) में दो ऐसे ही युवाओं ने मिसाल कायम की है। इन्होंने न केवल पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए एक ऐसी सेवा शुरू की, जो आज सैकड़ों तीर्थयात्रियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।
27 वर्षीय अंशुमान भंडारी, बदरीनाथ (Badrinath Dham) के पांडुकेश्वर गांव के निवासी हैं। वह पेशे से होटल व्यवसायी हैं और उनके पास देव दर्शनी के पास अमृत तारा होटल एंड रेस्टोरेंट नाम का प्रतिष्ठान है। यह होटल करीब 60 कमरों का है और हर साल हजारों यात्री यहां रुकते हैं।
यह भी पढ़ें : 56 Bhog : भगवान को 56 भोग क्यों लगते हैं? जानिए इसकी पौराणिक कथा
अंशुमान ने अपने होटल को सिर्फ व्यावसायिक केंद्र न मानते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की प्रयोगशाला बना दिया है। उन्होंने प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर रोक लगाने के लिए एक बेहतरीन पहल शुरू की है। होटल में अब यात्रियों को कांच की बोतलों में पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए उन्होंने होटल में RO मशीन लगवाई है, जिससे स्वच्छ पेयजल हर समय उपलब्ध रहता है।
अंशुमान कहते हैं, ‘शुरुआत में कुछ यात्रियों को असुविधा होती थी, लेकिन अब अधिकतर लोग हमारी इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। आने वाले समय में हम अपने होटल में प्लास्टिक की बोतलों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर देंगे।’
यह भी पढ़ें : Devi Temple : यहां देवताओं को सजा दी जाती है
अंशुमान की इस पहल को Badrinath Dham आने वाले यात्रियों से सराहना भी मिल रही है, और कई लोग खुद को इस मुहिम का हिस्सा मानने लगे हैं। यह बदलाव केवल एक होटल तक सीमित नहीं है – यह सोच फैल रही है।
दूसरी कहानी,

गोविंदघाट निवासी रवि चौहान भी होटल व्यवसाय से जुड़े हैं, लेकिन उन्होंने अपने संसाधनों से जो सेवा शुरू की है, वह बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) के हर तीर्थ यात्री के लिए वरदान बन चुकी है। रवि ने अपनी व्यक्तिगत प्रेरणा से एक निशुल्क एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है, जो 24 घंटे उपलब्ध रहती है।
रवि बताते हैं, ‘मेरे पिता को दमा था। बदरीनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र में उन्हें ऑक्सीजन की तुरंत जरूरत पड़ती थी, लेकिन सुविधा नहीं मिलती थी। उसी अनुभव से मैंने यह ठाना कि और किसी को यह तकलीफ न हो।’
रवि की फ्री एंबुलेंस सेवा ने अब तक कई तीर्थयात्रियों की जान बचाई है। यह सेवा विशेष रूप से यात्रा काल में सक्रिय रहती है, जब बदरीनाथ धाम (Badrinath Dham) में लाखों श्रद्धालु आते हैं और चिकित्सा सुविधाएं अक्सर सीमित हो जाती हैं।
युवाओं की सोच से बदलेगा Badrinath Dham का भविष्य
अंशुमान और रवि – दोनों की कहानियां अलग-अलग हैं, लेकिन मकसद एक है – बदरीनाथ धाम को बेहतर बनाना। जहां एक ओर अंशुमान पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, वहीं रवि जीवन रक्षा की मिसाल बन चुके हैं।
इन दोनों युवाओं का मुख्य पेशा भले ही होटल इंडस्ट्री हो, लेकिन समाज के प्रति जिम्मेदारी को इन्होंने बखूबी निभाया है। ये पहल न केवल प्रेरक है, बल्कि बदरीनाथ और आस-पास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए एक रोडमैप भी है।
यह भी पढ़ें : कैसे हुआ था भगवान शिव की पांच कन्याओं का जन्म?
यदि अन्य स्थानीय युवा भी इनसे प्रेरणा लें, तो वो दिन दूर नहीं जब बदरीपुरी न केवल आध्यात्मिक, बल्कि पर्यावरणीय और मानवीय सरोकारों का आदर्श तीर्थस्थल बन जाएगा।
बदरीनाथ की पावन वादियों में ‘अतिथि देवो भव’ की भावना तब और सार्थक होती है, जब स्थानीय लोग खुद आगे आकर समाज और प्रकृति के लिए काम करें।
https://uplive24news.blogspot.com/2025/05/Uttrakhand%20Badrinath%20Temple%20opening%20ceremony.html



