
Who should not eat papaya : पपीता दुनिया भर में एक सुपरफ्रूट माना जाता है। इसमें विटामिन A, C और E भरपूर मात्रा में होते हैं, साथ ही पपेन नामक एंजाइम पाचन को बेहद आसान बनाता है। यही वजह है कि सेहत के प्रति जागरूक लोग इसे अपनी रोज़मर्रा की डाइट में शामिल करते हैं।
लेकिन सच यही है कि हर किसी के लिए पपीता सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों के लिए यह फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है – खासकर तब, जब इसे कच्चा या अधिक मात्रा में खाया जाए।
आइए समझते हैं कि पपीता किसे नहीं खाना चाहिए, और क्यों। (Who should not eat papaya)
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दक्षिण अमेरिका से भारत तक का सफर
पपीता मूल रूप से दक्षिण अमेरिका का फल है – विशेषकर मैक्सिको और मध्य अमेरिका के क्षेत्रों में यह हजारों साल से उगाया जाता रहा है। पुरातात्विक अध्ययनों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में स्पैनिश और पुर्तगाली यात्रियों ने इसे एशिया और अफ्रीका में पहुंचाया।
भारत में पपीता 350–400 साल पहले आया और आज यह देश के सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में से एक है। इसके औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद ने भी इसे पाचन का मित्र बताया है।
कौन लोग पपीता नहीं खाएं? (Who should not eat papaya)
गर्भवती महिलाएं कच्चे पपीते से रहें दूर
कच्चे या आधे-पके पपीते में Latex और पपेन की मात्रा अधिक होती है। NIH और कई मेडिकल जर्नल्स की रिसर्च बताती है कि ये पदार्थ गर्भाशय में हल्की संकुचन गतिविधि को बढ़ा सकते हैं, जिससे प्रीमैच्योर लेबर या अन्य जटिलताओं का खतरा रहता है।
पका पपीता सामान्यतः कम जोखिम भरा होता है, लेकिन ज्यादातर डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएं इसे न खाएं या डॉक्टर से पूछकर ही खाएं। (Who should not eat papaya)
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जिनको दिल से जुड़ा रोग हो
पपीते में कुछ मात्रा में सायनोजेनिक कम्पाउंड्स मौजूद होते हैं, जो शरीर में जाकर हल्की मात्रा में हाइड्रोजन सायनाइड छोड़ सकते हैं। आम लोगों के लिए यह जोखिम रहित है, लेकिन हृदय रोगियों, खासकर Arrhythmia वालों के लिए यह समस्या बढ़ा सकता है।
हार्ट पेसमेकर, अनियमित धड़कन या ब्लड-थिनर लेने वाले रोगियों को इसे खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
लेटेक्स एलर्जी वाले लोग
Science Direct में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन में बताया गया कि पपीते के प्रोटीन और प्राकृतिक लेटेक्स के प्रोटीन में क्रॉस-रिएक्टिविटी होती है। यानि यदि आपको लेटेक्स से एलर्जी है, तो पपीता खाने पर खुजली, छींक, पेट दर्द और गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण हो सकते हैं। (Who should not eat papaya)
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हाइपोथायरॉइडिज्म वाले लोग
कुछ शोध यह संकेत देते हैं कि पपीते के कुछ तत्व थायरॉइड हार्मोन के कार्य में हस्तक्षेप कर सकते हैं। यदि आप पहले ही हाइपोथायरॉइडिज्म से परेशान हैं, तो पपीते का नियमित सेवन थकान, वजन बढ़ना और चक्कर जैसे लक्षणों को बढ़ा सकता है। इसलिए थायरॉइड मरीजों को डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
किडनी स्टोन वाले लोग
पपीते में विटामिन C की मात्रा बहुत अधिक होती है। शरीर में अतिरिक्त विटामिन C ऑक्सलेट्स में बदल जाता है, जो कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी स्टोन बना सकता है। जिन लोगों को पहले भी पथरी हो चुकी है, उन्हें पपीते की मात्रा सीमित रखनी चाहिए। (Who should not eat papaya)
यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय और कई अन्य पोषण शोध संस्थानों की रिसर्च में पाया गया कि पपेन एंजाइम जठरांत्र तंत्र में तेजी से कार्य करता है। अधिक मात्रा में पपेन सेवन करने पर शरीर में टिश्यू ब्रेकडाउन शुरू हो सकता है। कच्चे पपीते में पपेन अत्यधिक होता है, यही वजह है कि डॉक्टर पका पपीता ही खाने की सलाह देते हैं। (Who should not eat papaya)
तो क्या पपीता सभी के लिए खराब है? बिल्कुल नहीं। पपीता एक पौष्टिक और हल्का फल है, जो अधिकांश लोगों के लिए फायदा ही करता है।
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