
BMC election result analysis : महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों ने एक बार फिर बड़ा संदेश दे दिया है। 28 नगर निगमों में हुए चुनावों के रुझानों ने साफ कर दिया कि राज्य की सियासत का रुख किस ओर है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने लगभग सभी बड़े शहरी केंद्रों में मजबूत बढ़त बनाकर विपक्ष को हाशिये पर धकेल दिया है। मुंबई से लेकर पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर और ठाणे तक सत्ता का पलड़ा महायुति की ओर झुका हुआ दिख रहा है।
इन नतीजों (BMC election result analysis) को केवल नगर निगम चुनाव कहना शायद कम होगा, क्योंकि यह परिणाम सीधे-सीधे राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के मूड को भी दिखाते हैं। BJP के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों, राष्ट्रवाद और ‘विकसित भारत’ के विजन पर जनता की मुहर बताया।
मुंबई में इतिहास बदलता दिखा (BMC election result analysis)
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। करीब तीन दशकों से शिवसेना का गढ़ मानी जाने वाली मुंबई में तस्वीर बदल गई है। BJP और शिंदे गुट की शिवसेना मिलकर 117 वार्डों में आगे चल रही है। अकेले BJP 86 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि शिंदे सेना 31 सीटों पर आगे है।
वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। UBT गुट, MNS और NCP (SP) मिलकर भी बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे नजर आए। कांग्रेस की हालत और भी खराब रही, जो सिर्फ 10 सीटों पर सिमटी दिखी। धारावी से कांग्रेस की आशा दीपक काले की जीत पार्टी के लिए एक दुर्लभ राहत मानी जा रही है (BMC election result analysis)।
मुंबई में कुल 52.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो शहरी चुनावों के लिहाज से औसत से बेहतर माना जा रहा है। कई हाई-प्रोफाइल वार्डों में BJP और शिंदे सेना के उम्मीदवार मजबूत स्थिति में हैं, जिससे साफ है कि मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव हो चुका है।
50 साल पहले शुरू हुई थी शिवसेना के वर्चस्व की शुरुआत
बीएमसी की राजनीति में ठाकरे परिवार का दबदबा अचानक नहीं बना, बल्कि यह दशकों की चुनावी यात्रा का नतीजा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना का चुनावी सफर 1971 से शुरू होता है, जब पार्टी के नेता हेमचंद्र गुप्ते मुंबई के महापौर बने। यही वह दौर था, जब मुंबई की नगर राजनीति में शिवसेना की पहचान बननी शुरू हुई (BMC election result analysis)।
हालांकि, ठाकरे परिवार और शिवसेना का असली वर्चस्व 1985 के बाद दिखाई देता है। 5 अप्रैल 1985 को 170 सीटों के लिए हुए चुनावों के बाद 10 मई को नया नगर निगम अस्तित्व में आया और यहीं से शिवसेना ने बीएमसी की सत्ता पर मजबूत पकड़ बना ली। 1992 तक शिवसेना लगातार नगर निगम पर काबिज रही और मुंबई की स्थानीय राजनीति में उसकी जड़ें और गहरी होती चली गईं (BMC election result analysis)।
इसके बाद कुछ वर्षों के लिए सत्ता का समीकरण बदला। 1992 से 1996 के बीच आरपीआई और कांग्रेस ने मिलकर बीएमसी की कमान संभाली। लेकिन यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चला। 1996 के चुनावों में शिवसेना ने जोरदार वापसी की, और इसके साथ ही ठाकरे परिवार की पकड़ एक बार फिर मुंबई की सत्ता पर मजबूत हो गई।
1996 के बाद से 2022 तक लगातार 25 वर्षों तक शिवसेना ने बीएमसी पर शासन किया, और इस पूरे दौर में पार्टी का महापौर मुंबई की सत्ता का चेहरा बना रहा। इस लंबे समय ने ठाकरे परिवार को बीएमसी की राजनीति का सबसे प्रभावशाली केंद्र बना दिया। हालांकि, 2022 के बाद से बीएमसी के चुनाव नहीं हो पाए, लेकिन तब तक मुंबई की नगर सत्ता पर ठाकरे परिवार की छाप गहराई से दर्ज हो चुकी थी (BMC election result analysis)।
‘यूनाइटेड पवार’ फॉर्मूला फेल
पुणे नगर निगम चुनावों में सबसे बड़ा झटका पवार परिवार को लगा। NCP के दोनों गुटों के एकजुट होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। 165 सीटों वाली PMC में BJP करीब 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि पवार गुट महज 20 सीटों के आसपास सिमटा नजर आ रहा है (BMC election result analysis)।
2017 के बाद आठ साल के लंबे अंतराल पर हुए इन चुनावों में BJP ने एक बार फिर शहरी मतदाता पर अपनी पकड़ साबित की है। शुरुआती नतीजों में ही BJP के कई उम्मीदवार जीत दर्ज कर चुके हैं, जिससे पार्टी का मनोबल और बढ़ गया है।
Pimpri-Chinchwad में BJP का दबदबा बरकरार
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम में भी BJP की स्थिति मजबूत बनी हुई है। ताज़ा रुझानों के अनुसार, BJP लगभग 70 सीटों पर आगे, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP करीब 40 सीटों पर सिमटी हुई है। खास बात यह रही कि यहां BJP ने अपने महायुति सहयोगियों के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ा और फिर भी बढ़त बनाए रखी (BMC election result analysis)।
2017 से 2022 तक लगातार सत्ता में रही BJP ने यहां अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड को चुनावी मुद्दा बनाया, जिसका असर साफ दिखा।
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नागपुर में भाजपा का गढ़ और मजबूत
नागपुर, जिसे BJP का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, वहां भी महायुति ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। 151 सीटों वाले नागपुर नगर निगम में BJP अकेले 80 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के अन्य घटक यहां कहीं मुकाबले में नहीं दिखे।
करीब 51 प्रतिशत मतदान वाले इस चुनाव में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और RSS प्रमुख मोहन भागवत जैसे बड़े नामों की मौजूदगी भी चर्चा में रही (BMC election result analysis)।
ठाणे में शिंदे सेना आगे
ठाणे नगर निगम में भी शिंदे गुट की शिवसेना सबसे आगे दिख रही है। महायुति कुल 41 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिसमें शिंदे सेना 27 और BJP 14 सीटों पर आगे है। UBT सेना, MNS, NCP और कांग्रेस यहां सीमित प्रभाव में नजर आए।
कुछ वार्डों में दोनों शिवसेना गुटों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला, जिससे साफ है कि आने वाले समय में ठाणे की राजनीति और दिलचस्प हो सकती है (BMC election result analysis)।
महाराष्ट्र के इन स्थानीय निकाय चुनावों (BMC election result analysis) ने यह संकेत दे दिया है कि शहरी मतदाता फिलहाल महायुति के साथ खड़ा है। कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP जैसे दलों के लिए ये नतीजे आत्ममंथन का मौका हैं। वहीं, BJP और शिंदे सेना के लिए यह जीत 2029 की राजनीति की मजबूत बुनियाद मानी जा रही है।



