
Shani Dev : शनि जयंती हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन न्याय और कर्मफल के देवता शनि देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि शनि जयंती पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।
घर में क्यों नहीं रखी जाती शनि देव (Shani Dev) की मूर्ति?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव की पत्नी ने उन्हें श्राप दिया था कि उनकी दृष्टि जिस पर भी पड़ेगी, उस पर कठिन प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से शनिदेव की दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली और कठोर माना गया है। धार्मिक मान्यता कहती है कि जब भक्त पूजा के दौरान सीधे मूर्ति को देखते हैं, तो वह शनिदेव (Shani Dev) की वक्र दृष्टि के प्रभाव में आ सकते हैं।
यही कारण है कि घर में शनिदेव (Shani Dev) की प्रतिमा स्थापित करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है और परिवार के सदस्यों के जीवन में बाधाएं आने लगती हैं। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक विश्वास और परंपराओं पर आधारित है। इसलिए अधिकतर लोग शनिदेव (Shani Dev) की पूजा मंदिर में जाकर करना शुभ मानते हैं।
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शनि पूजा के प्रमुख नियम
शनिवार और शनि जयंती के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे शनिदेव (Shani Dev) प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं।
- शनिदेव (Shani Dev) की पूजा हमेशा श्रद्धा और संयम के साथ करनी चाहिए।
- पूजा के समय काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
- शनिदेव (Shani Dev) को सरसों का तेल, काला तिल और उड़द अर्पित किए जाते हैं।
- शनि मंदिर में जाकर दीपक जलाना और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने की भी परंपरा है।
- शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती (Shani Jyanti) मनाई जाती है। इस साल ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई, शनिवार को सुबह 4 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और 17 मई, रविवार को देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।
उदय तिथि के आधार पर शनि जयंती 2026 का पर्व 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन ही पड़ रही है, जिसे बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है।
शनि जयंती पूजा विधि
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करके एक चौकी पर काला कपड़ा बिछाएं। फिर शनिदेव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा के दौरान पंचामृत या पंचगव्य से अभिषेक करें और कुमकुम तथा काजल अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं और धूप-दीप से पूजा करें। शनिदेव (Shani Dev) को फूल, काला तिल और तेल से बनी मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
इस दिन श्रद्धा के साथ शनि मंत्रों का जाप और शनि चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। अंत में आरती करें और पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
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शनि जयंती पर करें ये सरल उपाय
शनि जयंती के दिन जरूरतमंद लोगों को काला तिल, कंबल, लोहे की वस्तुएं या उड़द दाल का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने और शनि मंदिर में तेल चढ़ाने की भी परंपरा है।
मान्यता है कि इन उपायों को करने से शनि दोष (Shani Dosh) कम होता है और जीवन में चल रही बाधाओं से राहत मिल सकती है।
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