Dharm Varada Chaturthi : वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर वरदा चतुर्थी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा करने से बिगड़े कार्य बनने लगते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए जानते हैं Varada Chaturthi 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
वरदा चतुर्थी कब है? (Dharm Varada Chaturthi Date)
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार वरदा चतुर्थी का व्रत 20 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
वरदा चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Dharm Varada Chaturthi Muhurat)
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:05 बजे से 04:46 बजे तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02:34 बजे से 03:39 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 07:06 बजे से 07:27 बजे तक
- निशिता मुहूर्त – रात 11:57 बजे से 12:38 बजे तक
वरदा चतुर्थी पूजा विधि (Dharm Varada Chaturthi Puja Vidhi)
वरदा चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद घर और मंदिर की साफ-सफाई करें। पूजा के लिए लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
अब गणेश जी को सिंदूर का तिलक लगाएं और फूल, धूप, दीप अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर विधि-विधान से आरती करें। इस दिन ‘ॐ गं गणपतयै नमः’ मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है (Dharm Varada Chaturthi)।
वरदा चतुर्थी पर भगवान गणेश को 21 दूर्वा दल, मोदक, लड्डू, गुड़, फल और मिठाई चढ़ाएं।
पूजा के बाद गणेश व्रत कथा का पाठ करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
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वरदा चतुर्थी व्रत (Dharm Varada Chaturthi) का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरदा चतुर्थी का व्रत रखने से भगवान गणेश भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर करियर, शिक्षा, व्यापार और पारिवारिक जीवन में आ रही परेशानियां कम होने लगती हैं।
गणेश जी को बुद्धि, सुख और समृद्धि का देवता माना जाता है। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से छात्रों और नए कार्य शुरू करने वाले लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है।
वरदा चतुर्थी (Dharm Varada Chaturthi) पर इन बातों का रखें ध्यान
- भगवान गणेश को तुलसी के पत्ते अर्पित न करें।
- तामसिक भोजन से दूर रहें।
- किसी से विवाद या कटु वचन न बोलें।
- घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
- शाम की आरती के बाद दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
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