
EC announces phase 3 SIR : चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस चरण के तहत देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। चुनाव आयोग के मुताबिक इस प्रक्रिया के दौरान करोड़ों मतदाताओं के घर-घर जाकर जानकारी जुटाई जाएगी।
आयोग ने बताया कि जनगणना के तहत चल रही गृह-सूचीकरण प्रक्रिया और साझा जमीनी तंत्र को ध्यान में रखते हुए SIR के तीसरे चरण का कार्यक्रम तय किया गया है (EC announces phase 3 SIR)।
36 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं का होगा सत्यापन
चुनाव आयोग के अनुसार, तीसरे चरण में करीब 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) तैनात किए जाएंगे। ये अधिकारी 36.73 करोड़ से अधिक मतदाताओं के घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे और मतदाता सूची में दर्ज जानकारियों का सत्यापन करेंगे।
आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी नाम हटाने, नए मतदाताओं को जोड़ने और गलतियों को सुधारने में मदद मिलेगी (EC announces phase 3 SIR)।
इन 16 राज्यों में होगा SIR का तीसरा चरण
तीसरे चरण के तहत जिन राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया जाएगा, उनमें शामिल हैं – आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र, मिजोरम, मणिपुर, मेघालय, कर्नाटक, तेलंगाना, सिक्किम, नागालैंड और त्रिपुरा।
यह भी पढ़ें : UP Live News Weather Update : यूपी में आंधी-बारिश का कहर, बरेली में युवक उड़ा
इन केंद्र शासित प्रदेशों में भी चलेगा अभियान – दिल्ली, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली-दमन दीव
चुनाव आयोग ने बताया कि दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी (EC announces phase 3 SIR)।
आयोग के मुताबिक तीसरे चरण के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरा देश SIR प्रक्रिया के दायरे में आ जाएगा। इन क्षेत्रों में मौसम और बर्फबारी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बाद में कार्यक्रम घोषित किया जाएगा (EC announces phase 3 SIR)।
बिहार से हुई थी शुरुआत
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का पहला चरण केवल बिहार में आयोजित किया गया था। इसके बाद आयोग ने इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू करना शुरू किया।
दूसरा चरण 4 नवंबर 2025 से शुरू हुआ था। इस चरण में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हुआ था। बंगाल में इसे लेकर सबसे ज्यादा विवाद हुआ।



