
NDRF in Myanmar
म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों में सहायता के लिए ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत 80 NDRF (NDRF in Myanmar) कर्मियों की एक विशेष टीम को भेजा है।
यह दल अत्याधुनिक बचाव उपकरणों से लैस होकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का कार्य करेगा। भारतीय वायुसेना (IAF) के दो विमानों से यह दल गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से रवाना हुआ।
इस अभियान (NDRF in Myanmar) में शामिल NDRF कर्मी अपने साथ मजबूत कंक्रीट कटर, ड्रिल मशीन, हथौड़े, प्लाज्मा कटिंग मशीन और अन्य आधुनिक बचाव उपकरण लेकर गए हैं, जिससे वे ढही हुई इमारतों और मलबे के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल सकें।
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इस टीम के साथ चार विशेष खोजी कुत्ते भी भेजे गए हैं, जो मलबे में दबे जीवित लोगों का पता लगाने में मदद करेंगे। यह बचाव अभियान अंतरराष्ट्रीय खोज और बचाव सलाहकार समूह (INSARAG) के मानकों के अनुसार संचालित किया जाएगा।
इस मिशन का नेतृत्व गाजियाबाद स्थित 8वीं NDRF बटालियन के कमांडेंट पीके तिवारी कर रहे हैं। म्यांमार में एनडीआरएफ (NDRF in Myanmar) के लिए अगले 24 से 48 घंटे राहत और बचाव कार्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि इस दौरान अधिकतम लोगों की जान बचाने की कोशिश की जाएगी।
इसके अलावा, भारत ने एक तीसरी NDRF टीम कोलकाता में स्टैंडबाय पर रखा है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत म्यांमार भेजा जा सकता है।
भारत ने राहत सामग्री भेजने में भी त्वरित कार्रवाई की है। शनिवार को भारतीय वायुसेना के C-130J मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान के जरिए 15 टन राहत सामग्री म्यांमार के यांगून शहर भेजी गई। इस राहत सामग्री में खाद्य पदार्थ, दवाइयां, तंबू और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं, जो भूकंप प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने में मदद करेंगे।
बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा
शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने म्यांमार और थाईलैंड (Earthquake in Myanmar and Thailand) में भारी तबाही मचाई। कुछ ही मिनटों के अंदर 6.7 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, 1,644 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 1,002 से ज्यादा मौतें म्यांमार (Myanmar) में हुई हैं। सबसे अधिक तबाही मांडले (Mandalay) शहर में देखी गई, जो म्यांमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और जहां करीब 17 लाख लोग रहते हैं। भूकंप के कारण कई इमारतें, पुल और सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है।
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भारत और म्यांमार (India and Myanmar) के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा साझा होती है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध हैं।
इस आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि भारत म्यांमार और थाईलैंड को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। भारत पहले भी आपदा राहत अभियानों में सक्रिय रहा है। 2015 में नेपाल भूकंप और 2023 में तुर्की भूकंप के दौरान भी NDRF की टीमें राहत और बचाव कार्यों के लिए भेजी गई थीं।
भारत द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन ब्रह्मा (Operation Brahma) न केवल मानवीय सहायता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों की कठिन परिस्थितियों में मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता है। इस अभियान से न केवल प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि भारत-म्यांमार संबंधों को और मजबूती भी मिलेगी।
https://en.wikipedia.org/wiki/National_Disaster_Response_Force



