
न्यूयॉर्क मेयर की रेस में जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) का नाम तेजी से उभर रहा है। वह एक प्रोग्रेसिव यानी उदारवादी नेता के रूप में सामने आते हैं, जो सामाजिक न्याय, ट्रांजिट रिफॉर्म और आवासीय अधिकारों की बात करते हैं। लेकिन इस चमकते हुए प्रोफाइल के नीचे कुछ ऐसे सवाल और संदेह हैं जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
उदारवाद या छुपा हुआ कट्टरवाद?
ममदानी (Zohran Mamdani) खुद को एक उदारपंथी नेता के रूप में पेश करते हैं, लेकिन जब बात डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) जैसे धुर-दक्षिणपंथियों की आलोचना की आती है, तो उनकी भाषा और तेवर कट्टरपंथी से कम नहीं लगते। क्या यह वही टॉलरेंस है, जिसे वे अपने भाषणों में बार-बार दोहराते हैं? या यह selective tolerance है, जो केवल उनकी राजनीति के अनुकूल स्थितियों में प्रकट होता है?
उनके विचारों से यह आशंका भी उठती है कि उनकी नीतियां न्यूयॉर्क जैसे विविधता वाले शहर में सामाजिक विभाजन को और बढ़ा सकती हैं। एक तरफ वह समावेशिता की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपने भाषणों और ट्वीट्स में ऐसे स्टैंड लेते हैं जो समुदायों के बीच ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं।
Zohran Mamdani… हम यह आर्टिकल इसलिए अंग्रेजी में लिख रहे हैं
मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति
जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) ने हाल ही में इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी आलोचना की, जिसे उनके समर्थकों ने ‘मानवीय पक्ष’ के रूप में प्रस्तुत किया। लेकिन एक बड़ा सवाल यह है: क्या यह आलोचना एकतरफा नहीं है?
जब हमास जैसे आतंकी संगठन इस्राइल में घुसकर 1,000 से ज्यादा नागरिकों की हत्या करते हैं, जब 26/11 या 9/11 जैसी घटनाएं होती हैं, या जब कश्मीर के पहलगाम में निर्दोषों को गोलियों से भून दिया जाता है, तब ममदानी जैसे ‘मानवाधिकार’ कार्यकर्ता चुप क्यों रहते हैं?
यह चुप्पी उन्हें निष्पक्ष आलोचक से ज़्यादा एक खास वोट बैंक के प्रतिनिधि के रूप में पेश करती है। क्या यह नागरिक धर्मनिष्ठा है या वोट बैंक के प्रति निष्ठा? यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अमेरिकी नागरिकता लेने के बावजूद ममदानी खुद को अमेरिकी मूल्यों से अधिक अपने धार्मिक-राजनीतिक नजरिए से निर्देशित करते हैं।
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वोट के लिए मोदी और नेतन्याहू की आलोचना?
ममदानी (Zohran Mamdani) अक्सर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और इस्राइल के नेतन्याहू की आलोचना करते दिखते हैं। यह आलोचना कभी-कभी नीतिगत बहस से ज्यादा वैचारिक और सांप्रदायिक लगती है।
यहां सवाल यह उठता है कि क्या ये आलोचनाएं नीति के स्तर पर हैं या केवल मुस्लिम और अरब वोटर्स को खुश करने की रणनीति का हिस्सा हैं?
मुफ्त योजनाएं या मुफ्तखोरी की आदत?
Zohran Mamdani के वादों में मुफ्त ट्रांसपोर्ट, फ्री हाउसिंग जैसी घोषणाएं हैं, जो पहली नजर में लोकलुभावन लगती हैं। लेकिन न्यूयॉर्क जैसे महानगर में वर्किंग क्लास और टैक्सपेयर पहले से ही भारी दबाव में हैं। ऐसे में यह योजनाएं क्या वाकई जरूरतमंदों की मदद करेंगी, या फिर एक मुफ्तखोरी की संस्कृति को जन्म देंगी?
इसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम लंबे समय में अमेरिका की व्यवस्था को खोखला कर सकते हैं।
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अमेरिका की आलोचना, लेकिन यहीं सपने?
यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि ममदानी (Zohran Mamdani) जैसे नेता अमेरिकी व्यवस्था की हर बात पर सवाल उठाते हैं – नस्लवाद, पूंजीवाद, ट्रंपवाद, इस्राइल नीति, भारत नीति… लेकिन अपने राजनीतिक करियर और सपनों को साकार करने के लिए इन्हें अमेरिका ही सबसे मुफीद जगह लगती है।
अगर उन्हें अमेरिका इतना ही असमान और अन्यायी लगता है, तो क्या वे उन देशों में रहना पसंद करेंगे जहां शरीयत आधारित शासन है, या जहां कट्टर धार्मिक कानून हैं? शायद नहीं।
टकराव की राजनीति के नतीजे क्या होंगे?
ममदानी (Zohran Mamdani) का अब तक का राजनीतिक रुख देखा जाए, तो वह बार-बार टकराव का रास्ता चुनते हैं – चाहे वह ट्रंप विरोध हो, या पुलिस के बजट में कटौती की मांग। अब सवाल है कि जब ऐसे व्यक्ति के हाथों में न्यूयॉर्क जैसे शहर की कमान होगी, तब क्या वहां विकास की योजनाएं जमीन पर उतर पाएंगी? या फिर पूरा तंत्र ही राजनीतिक जिद और विरोध का अखाड़ा बन जाएगा?
ब्रिटेन की चेतावनी और न्यूयॉर्क का दोहराव
हाल ही में अमेरिकी रिपब्लिकन नेताओं – डोनाल्ड ट्रंप और उनके डिप्टी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने ब्रिटेन की आलोचना की थी कि वहां कुछ कट्टर सोच वाले बाहरी नेता सत्ता में आ गए हैं। अब वही गलती न्यूयॉर्क दोहराने की तैयारी कर रहा है।
क्या हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वोट बैंक के दबाव में शहरों की बुनियादी स्थिरता दांव पर लगाई जा रही है?
जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) की उम्मीदवारी कोई साधारण बात नहीं है। यह न्यूयॉर्क की आत्मा, उसकी बहुलता और उसके भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
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क्या हम प्रगतिशीलता के नाम पर एक ऐसे एजेंडे को स्वीकार कर रहे हैं, जो दीर्घकालिक रूप से समाज को बांट देगा?
न्यूयॉर्क को जरूरत है एक दूरदर्शी, संतुलित और व्यावहारिक नेतृत्व की – ना कि एक ऐसे नेता की जो खुद को उदार दिखाकर विभाजन की जमीन तैयार करे।
UPLIVE24 हिंदी वेबसाइट है, इसके बावजूद आज यह आर्टिकल अंग्रेजी में भी पब्लिश करना पड़ा, क्योंकि मुद्दा ही कुछ ऐसा है। अंग्रेजी के लिए यहां क्लिक करें।



