भारत ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया था। अब अमेरिकी कानून Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत सामने आए दस्तावेजों से पता चला है कि जब भारतीय बम पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर बरस रहे थे, तो मुनीर और शहबाज ने मदद मांगी थी।
अमेरिकी दस्तावेज बताते हैं कि 6 मई से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में करीब 60 बार अमेरिकी नेताओं, रक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और पत्रकारों से संपर्क किया। यह वही समय था जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद Operation Sindoor शुरू किया था।
यह भी पढ़ें : JEE Advanced Admit Card : इस तरह डाउनलोड करें जेईई अडवांस्ड का एडमिट कार्ड
आतंकी ठिकानों पर कहर बन बरसा था Operation Sindoor
भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) लॉन्च किया था। इसका मकसद पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई करना था।
भारत सरकार के मुताबिक, सेना ने नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया था। सरकार ने यह भी कहा था कि किसी पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया। भारत ने इस कार्रवाई को सीमित और संतुलित बताया था।
यह भी पढ़ें : OTT Releases This Week : मोबाइल में घुस चुके हैं साइटाडेल के जासूस
अमेरिका में क्या कर रहा था पाकिस्तान?
FARA दस्तावेजों से पता चला है कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद पाकिस्तान लगातार अमेरिकी नेताओं और अधिकारियों से संपर्क करने में जुट गया था।
कई जगह दस्तावेजों में में लिखा है कि पाकिस्तानी राजदूत अमेरिकी अफसरों से मुलाकात की मांग कर रहे थे। इनमें अमेरिकी सांसदों के दफ्तर, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारी और रक्षा मामलों के लोग शामिल थे।
आसिम मुनीर का दावा निकला झूठा
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद भारत ने अमेरिका के जरिए युद्धविराम और बातचीत की इच्छा जताई थी।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के लिए इसे स्वीकार किया। हालांकि भारत ने इस दावे को कभी नहीं माना।
भारत का साफ कहना था कि युद्धविराम के लिए पाकिस्तान के DGMO ने ही भारत से संपर्क किया था और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी।
यह भी पढ़ें : Donald Trump claim on Iran wrong : ईरान पर ट्रंप के दावे की पेंटागन ने ही खोली पोल
भारत और पाकिस्तान की रणनीति में फर्क
दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि उस समय भारत और पाकिस्तान की रणनीति अलग-अलग थी।
भारत दुनिया के सामने आतंकवाद का मुद्दा उठा रहा था और पहलगाम हमले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा था। वहीं पाकिस्तान अमेरिका में राजनीतिक और रक्षा स्तर पर लगातार संपर्क बढ़ाने में लगा हुआ था।



