
दिल्ली के शक्ति नगर स्थित आलम चंद मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास रोहित गोपाल सूत जी महाराज ने अपने प्रवचनों में श्राद्ध कर्म और पितृ पक्ष (Shradh in Pitru Paksh) के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि पितरों की तृप्ति और वंश की समृद्धि के लिए किए जाने वाले श्राद्ध कर्म को शास्त्रों में धर्म का अभिन्न अंग माना गया है।
संस्कृत में ‘श्राद्ध’ (Shradh in Pitru Paksh) का अर्थ है श्रद्धा भाव से किया गया कर्म। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और स्मरण का प्रतीक है। हमारे धर्मग्रंथों में श्राद्ध और पितृ पक्ष के महत्व का विस्तार से उल्लेख मिलता है।
यह भी पढ़ें : Pitru Dosh : क्यों सबसे खतरनाक कहा जाता है पितृ दोष, कैसे मिलेगा छुटकारा?
व्यास जी ने कहा कि पितृ पक्ष (Shradh in Pitru Paksh) के दौरान भागवत कथा का श्रवण और आयोजन अत्यंत फलदाई होता है। यह कथा न केवल मानव को जीवन जीने की कला सिखाती है, बल्कि धर्म, नैतिकता और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है।
कथा स्थल पर भजन-कीर्तन के साथ भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे। कार्यक्रम का समापन 21 सितंबर को पितृ अमावस्या के दिन किया जाएगा।
इस अवसर पर अशोक बंसल, राहुल शर्मा, मंडप आचार्य आकाश जुयाल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
क्या है शापित ग्रंथ Neelavanti में, जो इसे पढ़ना मना है?



