

मध्य पूर्व (Middle East Conflict) एक बार फिर बड़ी राजनीतिक हलचलों का गवाह बन रहा है। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को फिलिस्तीन (Recognition of Palestine) को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही ये देश G7 की पहली अर्थव्यवस्थाएं बन गए हैं जिन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता दी है।
पुर्तगाल ने भी देर शाम यह कदम उठाया और विदेश मंत्री पाउलो रेंगल ने साफ कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना पुर्तगाल की विदेश नीति की स्थायी लाइन का हिस्सा है। दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) ही शांति का रास्ता है और युद्धविराम तत्काल होना चाहिए।
इसके अलावा बेल्जियम, फ्रांस, लक्जमबर्ग, माल्टा, और संभवतः न्यूजीलैंड व लिकटेंस्टीन भी UN Conference on Palestine में यह घोषणा करने वाले हैं (Recognition of Palestine)।
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पश्चिमी देशों का दबाव और अमेरिका की नाराजगी
यह कदम फ्रांस और सऊदी अरब की अगुवाई में बुलाए गए विशेष सम्मेलन से जुड़ा है, जिसमें दो-राष्ट्र समाधान को फिर से जिंदा करने की कोशिश हो रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने चेतावनी दी है कि इजराइल की मौजूदा नीतियां फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र (Recognition of Palestine) बनने की संभावनाओं को नष्ट कर रही हैं।
हालांकि, अमेरिका (US) इस मान्यता को Performative Gesture बता रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है – बंधकों की रिहाई, इजराइल की सुरक्षा और पूरे क्षेत्र में ऐसी शांति जो हमास (Hamas) से मुक्त हो।
इजराइल का कड़ा विरोध
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने इन घोषणाओं (Recognition of Palestine) को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि फिलिस्तीनी राज्य कभी अस्तित्व में नहीं आएगा। जो देश मान्यता दे रहे हैं वे आतंकवाद को इनाम दे रहे हैं। हमने यह राज्य बनने से पहले भी रोका है और आगे भी रोकेंगे। यहूदियों की बस्तियों (Jewish Settlements) का विस्तार जारी रहेगा।
नेतन्याहू ने साफ कहा कि जॉर्डन नदी (Jordan River) के पश्चिम में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं होगा और इस मान्यता का जवाब वह अमेरिका यात्रा से लौटने के बाद देंगे।
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फिलिस्तीनी अथॉरिटी और सुधार का सवाल
इस बीच, फ्रांस और अरब देशों ने यह योजना बनाई है कि युद्धविराम की स्थिति में गाजा (Gaza) में हमास को हटाकर एक पुनर्गठित और लोकतांत्रिक फिलिस्तीनी अथॉरिटी (Palestinian Authority – PA) को सत्ता सौंपी जाए। अब्बास (Mahmoud Abbas) ने भी कुछ सुधारों का वादा किया है और 7 अक्टूबर 2023 के हमले को आतंकवादी कृत्य बताते हुए हमास से दूरी बनाई है।
लेकिन बड़ी चुनौती यह है कि इजराइल और अमेरिका, दोनों ही फिलिस्तीनी अथॉरिटी को भरोसेमंद साझेदार नहीं मानते। अमेरिका ने तो अब्बास को UN में बोलने से रोकने के लिए वीजा देने से भी इंकार कर दिया, हालांकि UN महासभा ने इसके खिलाफ वोट किया।
बढ़ता तनाव और भविष्य की आशंकाएं
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इजराइल वेस्ट बैंक (West Bank) में और जमीन पर कब्ज़ा करता है तो यूरोप ट्रेड प्रतिबंध (European Trade Sanctions) भी लगा सकता है और इजराइल की राजनीतिक अलगाव की स्थिति गहरी हो सकती है।
दूसरी ओर, UAE जैसे देश, जिन्होंने 2020 में अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के तहत इजराइल से रिश्ते सामान्य किए थे, अब दबाव में हैं क्योंकि उन्होंने पहले ही कहा है कि वेस्ट बैंक का विलय ‘रेड लाइन’ है।
फ्रांस, सऊदी अरब, नॉर्वे और स्पेन मिलकर एक आपातकालीन आर्थिक पैकेज तैयार कर रहे हैं ताकि फिलिस्तीनी अथॉरिटी (Recognition of Palestine) का पतन न हो। इसका लक्ष्य है अगले छह महीनों में 200 मिलियन डॉलर जुटाना।
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