
Traps of Ancient Hunters : दक्षिण अमेरिका के चिली के एंडीज पर्वतीय इलाकों में पुरातत्वविदों ने एक हैरान करने वाली खोज की है। सैटेलाइट की मदद से वैज्ञानिकों ने यहां प्राचीन शिकार जालों (Traps of Ancient Hunters) का एक विशाल नेटवर्क खोज निकाला है, जो हजारों साल पहले के शिकारी समुदायों की बुद्धिमत्ता और इंजीनियरिंग को दर्शाता है।
यह शोध ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर (University of Exeter) के डॉ. एड्रियन ओयानेडर की टीम ने किया है। टीम ने एंटिक्विटी नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में बताया कि उन्होंने कमारोनेस नदी बेसिन के 4,600 वर्ग किलोमीटर के इलाके में कुल 76 विशाल पत्थर के जाल खोजे हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘चाकू’ (Chacus) कहा जाता है।
ये जाल V आकार के विशाल ढांचे हैं, जो पत्थरों से बनाए गए हैं और करीब 1.5 मीटर ऊंचे हैं। इनकी लंबाई कई बार 150 मीटर से भी ज्यादा होती है, जो एक संकरे घेरे की ओर जाती है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 95 वर्ग मीटर होता है। माना जाता है कि जब जंगली जानवर, खासकर विकुनास, इन जालों में फंस जाते थे, तो उन्हें लगभग दो मीटर गहरे गड्ढों में गिराकर पकड़ा जाता था। (Traps of Ancient Hunters)
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सैटेलाइट से दिखा छिपा हुआ इतिहास
दिलचस्प बात यह है कि ये जाल ऊंचे और कठिन पहाड़ी इलाकों में बनाए गए थे, जहां हवा पतली और मौसम बेहद कठोर होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन चाकूओं (Traps of Ancient Hunters) को विकुनास के चराई मार्गों के अनुरूप बनाया गया था, ताकि जानवरों को आसानी से जाल में फंसाया जा सके।
इन जालों की घनी संख्या से यह संकेत मिलता है कि यहां संगठित और योजनाबद्ध शिकार व्यवस्था मौजूद थी, जो इंका सभ्यता से भी बहुत पहले की है। इस तरह के पत्थर के जाल पहले मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में मिल चुके हैं, लेकिन दक्षिण अमेरिका में इतनी बड़ी संख्या में पहली बार मिले हैं।
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इस खोज ने पुरातत्वविदों की उस मान्यता को चुनौती दी है कि लगभग 2000 ईसा पूर्व (B.C.) तक एंडीज के लोग पूरी तरह कृषि आधारित जीवन अपना चुके थे। इन जालों (Traps of Ancient Hunters) के प्रमाण बताते हैं कि शिकार और पशुपालन की परंपरा औपनिवेशिक काल तक जारी रही थी।
शिकारी बस्तियों के भी मिले सबूत
शोधकर्ताओं ने इन जालों के आसपास करीब 800 छोटे बस्तियोंके अवशेष भी पहचाने हैं। अधिकांश बस्तियां जालों से 5 किलोमीटर के दायरे में हैं। इससे अंदाजा लगाया गया है कि ये मौसमी शिविर थे, जहां शिकारी समूह अपने शिकार अभियानों के दौरान कुछ समय के लिए ठहरते थे।
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