
New labour codes impact : भारत में कई दशकों से अलग-अलग राज्यों और सेक्टर्स में अलग-अलग तरह के श्रम कानून लागू थे। पुराने कानूनों के इस उलझे हुए ढांचे को अब एक साफ और सरल व्यवस्था से बदल दिया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए लेबर कोड आखिरकार देशभर में लागू हो गए हैं। इन नए नियमों का सीधा असर हर उस व्यक्ति पर पड़ेगा जो नौकरी करता है – चाहे वह फुल-टाइम वर्कर हो, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करता हो, फैक्टरी में हो या किसी भी सर्विस सेक्टर का हिस्सा हो।
नई व्यवस्था का मकसद एक ऐसा सिस्टम बनाना है, जहां कंपनियों का काम भी आसान हो और कर्मचारियों को भी बुनियादी सुरक्षा और स्पष्ट अधिकार मिलें। आइए समझते हैं कि ये बदलाव आपके रोजमर्रा के कामकाज में क्या-क्या फर्क लाते हैं। (New labour codes impact)
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सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी
अब से वेज यानी वेतन की एक समान परिभाषा पूरे देश में लागू होगी। इसी एक बदलाव ने कई तरह के लाभों की गणना को बदल दिया है, जिसमें सबसे बड़ा फायदा ग्रेच्युटी का है। पहले किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल तक नौकरी करनी पड़ती थी। लेकिन अब फिक्स्ड-टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी मिल जाएगी।
आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, मीडिया, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर्स में यह बदलाव लाखों कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की एक नई परत जोड़ता है (New labour codes impact)।
180 दिनों में मिलेगा सालाना पेड लीव
पहले सालाना पेड लीव का हक पाने के लिए 240 दिन काम करना जरूरी था। अब यह सीमा 180 दिन कर दी गई है।
यह बदलाव उन कर्मचारियों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जो सीजनल काम करते हैं, शिफ्टों में काम करते हैं या जिनकी नौकरी का स्वरूप पहले लंबे कामकाजी दिनों की शर्तें पूरी नहीं कर पाता था (New labour codes impact)।
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ओवरटाइम दोगुने रेट पर
नए नियमों में 8 घंटे की वर्किंग डे और 48 घंटे की वीकली वर्किंग लिमिट पहले की तरह बनी रहेगी। लेकिन राज्यों को अब यह लचीलापन दिया गया है कि वे चाहें तो 4 दिन का लंबा हफ्ता अनुमति दें या 5–6 दिनों का शेड्यूल तय करें। (New labour codes impact)ओवरटाइम पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा और कर्मचारियों को दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा।
मिलेगा लिखित अपॉइंटमेंट लेटर
अब यह कानूनन जरूरी है कि हर कर्मचारी को कंपनी द्वारा एक लिखित अपॉइंटमेंट लेटर दिया जाए, जिसमें वेतन, काम के घंटे, कर्तव्य और अधिकारों की स्पष्ट जानकारी हो। इससे उन लाखों कर्मचारियों का लाभ होगा जिन्हें पहले मौखिक वादों या अधूरे दस्तावेजों पर नौकरी करनी पड़ती थी (New labour codes impact)।
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न्यूनतम वेतन सभी सेक्टर्स पर लागू
अब न्यूनतम वेतन सिर्फ सूचीबद्ध उद्योगों पर नहीं, बल्कि हर क्षेत्र और हर सेक्टर पर लागू होगा। केंद्र सरकार एक राष्ट्रीय फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे कोई भी राज्य उससे कम वेतन नहीं निर्धारित कर सकेगा। इससे वेतन संरचना में एक समानता आएगी और श्रमिकों को न्यूनतम आय की गारंटी मिलेगी (New labour codes impact)।
क्या घर ले जाने वाली सैलरी कम होगी?
नए वेज स्ट्रक्चर के तहत आपकी सैलरी का बड़ा हिस्सा वेज कैटेगरी में आएगा। इसका मतलब है कि PF और ग्रेच्युटी जैसी कटौतियां बढ़ सकती हैं। कई मामलों में टेक-होम सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय में रिटायरमेंट फंड और सेवा लाभ अधिक मजबूत बनेंगे (New labour codes impact)।
समय पर मिलेगा वेतन
पहले समय पर वेतन देने का कानून सिर्फ एक निश्चित आय सीमा तक के कर्मचारियों पर लागू होता था। अब यह प्रावधान हर कर्मचारी पर लागू होगा। वेतन में देरी होने पर कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है (New labour codes impact)।
ऑफिस आते-जाते समय दुर्घटना भी अब ‘वर्कप्लेस एक्सीडेंट’
नए कोड में एक बड़ा बदलाव यह है कि घर से दफ्तर आने-जाने के दौरान होने वाली दुर्घटना को भी वर्कप्लेस इंसीडेंट माना जाएगा (कुछ शर्तों के साथ)। इससे मुआवजा, बीमा और ESI लाभों तक पहुंच और आसान होगी।
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ESIC कवरेज पूरे भारत में
अब ESI सिर्फ नोटिफाइड क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। फैक्ट्रियों, दुकानों, प्लांटेशन्स और यहां तक कि खतरनाक काम करने वाली छोटी एक-व्यक्ति यूनिट्स भी इसके दायरे में आएंगी।
इससे मेडिकल इंश्योरेंस, विकलांगता लाभ और मातृत्व लाभ देशभर में अधिक लोगों तक पहुंचेंगे (New labour codes impact)।
मीडिया और डिजिटल क्रिएटर्स के लिए औपचारिक सुरक्षा
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स, OTT वर्कर्स, पत्रकारों, डबिंग आर्टिस्ट, कैमरा क्रू – सभी को अब औपचारिक अपॉइंटमेंट लेटर मिलना अनिवार्य है। पहली बार इन क्रिएटिव उद्योगों के श्रमिकों को स्पष्ट नियमों और सुरक्षा का लाभ मिलेगा, जो लंबे समय से अनुपस्थित था। (New labour codes impact)
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