
G RAM G Bill : लोकसभा ने भारी हंगामे और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Bill, 2025 को पारित कर दिया है। इस बिल के साथ ही लगभग 20 साल पुराना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) इतिहास बन गया है। सरकार का दावा है कि नया कानून ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा, जबकि विपक्ष इसे गरीब-विरोधी और गांधी की विरासत पर हमला बता रहा है।
क्या है विकसित भारत G RAM G Bill?
नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन का अकुशल मजदूरी रोजगार देने की कानूनी गारंटी दी गई है। अभी तक MGNREGA के तहत यह सीमा 100 दिन थी। सरकार इसे विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़कर देख रही है।
MGNREGA से क्या बड़ा बदलाव?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यह योजना अब डिमांड-ड्रिवन नहीं रहेगी। MGNREGA में जहां राज्यों की मांग के अनुसार बजट तय होता था, वहीं नए कानून में केंद्र सरकार हर राज्य के लिए सालाना नॉर्मेटिव एलोकेशन तय करेगी। अगर खर्च इससे ज्यादा हुआ, तो उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
खर्च का बोझ अब किस पर?
नए कानून (G RAM G) के तहत केंद्र सरकार 60% खर्च उठाएगी और राज्यों को 40% खर्च उठाना होगा। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में केंद्र सरकार 90 फीसदी खर्च देगी। वहीं, MGNREGA में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र उठाता था। इस बदलाव से राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
साल में 60 दिन काम बंद
VB G RAM G के तहत साल में 60 दिन योजना लागू नहीं होगी। ये दिन खेती के पीक सीजन (बुवाई और कटाई) के होंगे। सरकार का तर्क है कि इससे कृषि मजदूरों की कमी नहीं होगी, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इससे गरीब मजदूरों की आय पर असर पड़ेगा।
विपक्ष का विरोध क्यों?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इसे गांधी की विरासत का अपमान बताया। कांग्रेस सांसद जय प्रकाश ने कहा कि गांधी का नाम हटाना सबसे बड़ा अपराध है। विपक्ष का आरोप है कि यह कानून (G RAM G) गरीबों और दलितों के खिलाफ है, ग्राम सभाओं की भूमिका कमजोर करता है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है।
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ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि नया कानून गांवों को गरीबी-मुक्त बनाएगा और रोजगार के साथ आजीविका को मजबूत करेगा। BJP सांसदों का दावा है कि MGNREGA भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका था।
कानून लागू होने के छह महीने के भीतर हर राज्य को अपनी अलग योजना बनानी होगी। योजना अब पूरी तरह केंद्र प्रायोजित स्कीम की तरह चलेगी।
कुल मिलाकर, VB G RAM G Bill सिर्फ नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण रोजगार की पूरी सोच को बदलने वाला कानून है।
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