
Israel recognises Somaliland : दुनिया की भू-राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। इजराइल ने सोमालीलैंड (Somaliland) को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में मान्यता दे दी है। ऐसा करने वाला वह पहला संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश बन गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सोमालीलैंड पिछले 34 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए संघर्ष कर रहा था।
इजराइल के विदेश मंत्री गिदेओन सा’अर ने घोषणा की है कि इजराइल और सोमालीलैंड के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने का समझौता हो गया है (Israel recognises Somaliland)। इसके तहत दोनों देश एक-दूसरे की राजधानी में दूतावास खोलेंगे और राजदूत नियुक्त करेंगे।
यह भी पढ़ें : Christmas ban history : जब इंग्लैंड और अमेरिका में जुर्म था क्रिसमस मनाना
क्यों ऐतिहासिक है यह फैसला (Israel recognises Somaliland)?
सोमालीलैंड ने वर्ष 1991 में सोमालिया से अलग होकर स्वतंत्रता की घोषणा की थी। तब से यह क्षेत्र अपने आप को एक अलग देश की तरह चला रहा है – अपना राष्ट्रपति, संसद, मुद्रा, सेना और चुनाव प्रणाली के साथ। लेकिन अब तक किसी भी UN सदस्य देश ने इसे आधिकारिक मान्यता नहीं दी थी। इजराइल का यह कदम (Israel recognises Somaliland) इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
सोमालीलैंड क्या है और यह कैसे बना?
सोमालीलैंड का विचार औपनिवेशिक काल से जुड़ा है। सोमालीलैंड कभी ब्रिटिश सोमालीलैंड था, जबकि बाकी सोमालिया इटैलियन सोमालिया कहलाता था। 1960 में दोनों क्षेत्रों ने मिलकर सोमालिया नाम का एक देश बनाया। लेकिन यह एकता ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी।
1980 के दशक में सोमालिया के तानाशाह सियाद बर्रे के शासन में उत्तर-पश्चिमी इलाकों यानी आज का सोमालीलैंड पर भारी दमन हुआ। हजारों लोग मारे गए, शहर तबाह हुए और स्थानीय आबादी ने खुद को अलग पहचान के रूप में देखना शुरू किया। 1991 में सियाद बर्रे के पतन के बाद सोमालीलैंड ने खुद को स्वतंत्र गणराज्य घोषित कर दिया।
दोनों देशों (Somaliland vs Somalia) में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से बहुत फर्क है। सोमालीलैंड में स्थिर लोकतंत्र है, नियमित तौर पर चुनाव होते हैं, आतंकवाद बहुत कम है और स्थानीय शासन व्यवस्था मजबूत है।
दूसरी ओर सोमालिया में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता है। अराजकता बनी हुई है। इस्लामिक आतंकवादी सक्रिय हैं और शासन व्यवस्था कमजोर है।
सोमालीलैंड की आबादी लगभग 62 लाख है। इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पशुपालन और पशु निर्यात – खासतौर पर खाड़ी देशों को ऊंट, भेड़, बकरी बेचने, प्रवासियों के भेजे रेमिटेंस और व्यापार पर निर्भर है। इसके पास बर्बेरा पोर्ट (Berbera Port) भी है, जो रेड सी के पास रणनीतिक बंदरगाह है।
यह भी पढ़ें : Rai Stones Currency : इस देश में टनों वजनी पत्थर के चलते थे सिक्के
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) यहां पहले से एक सैन्य और लॉजिस्टिक बेस संचालित कर रहा है, जिसे यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ रणनीति से जोड़ा जाता है।
इजराइल के मान्यता देने के पीछे की रणनीति (Israel recognises Somaliland) क्या है?
विश्लेषकों के मुताबिक, सोमालीलैंड की भौगोलिक स्थिति इजराइल के लिए बेहद अहम है। यह क्षेत्र यमन के बेहद करीब है। यहां से रेड सी और अदन की खाड़ी पर नजर रखी जा सकती है।
इजराइली थिंक टैंकों के अनुसार, सोमालीलैंड से हूतियों पर खुफिया निगरानी रखी जा सकती है। यहां से यमन में लॉजिस्टिक सपोर्ट संभव है। भविष्य में सैन्य ऑपरेशन का बेस बन सकता है।
इजराइल सरकार ने इस फैसले (Israel recognises Somaliland) को Abraham Accords की भावना के अनुरूप बताया है।
हालांकि दूसरे देशों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह फिलहाल सोमालीलैंड को मान्यता देने के पक्ष में नहीं हैं। सोमालिया ने इजराइल के कदम (Israel recognises Somaliland) को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है।
अफ्रीकी यूनियन (AU) ने इस फैसले को खारिज करते हुए चेतावनी दी कि इससे अफ्रीका में अलगाववाद को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, मिस्र और तुर्की ने इजराइल की इस पहल (Israel recognises Somaliland) की कड़ी निंदा की।
क्या अब बाकी देश भी मान्यता देंगे? सवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन अभी इसकी उम्मीद कम है। हालांकि सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अबदिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही पहले ही कह चुके हैं कि वैश्विक मान्यता मिलना सिर्फ समय की बात है।
बिल्लियों को खत्म करने निकला न्यूजीलैंड, लेकिन क्यों?



