
Oldest human footprints : आज का सऊदी अरब, जिसे हम सूखे रेगिस्तान, तेज हवाओं और तपते रेत के समंदर के रूप में जानते हैं, कभी जीवन से भरपूर रहा होगा। सऊदी अरब के Nefud Desert में वैज्ञानिकों को ऐसे सबूत मिले हैं, जो बताते हैं कि आज से करीब 1 लाख 15 हजार साल पहले यहां इंसान मौजूद थे। यह सबूत मानव पैरों के जीवाश्म पदचिह्न (Oldest human footprints) हैं।
इस ऐतिहासिक स्थल को नाम दिया गया है Alathar, जिसका अरबी अर्थ होता है – निशान या छाप। यह जगह सऊदी अरब के पश्चिमी Nefud Desert में स्थित है। लंबे समय तक यह इलाका वैज्ञानिकों की नजरों से दूर रहा, क्योंकि यहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। लेकिन साल 2017 में हुए एक फील्ड सर्वे ने इतिहास की दिशा ही बदल दी।
वैज्ञानिकों को यहां एक अब लुप्त हो चुकी झील के किनारे मिट्टी में दबे हुए सात मानव पदचिह्न मिले (Oldest human footprints)। ये पदचिह्न इतने स्पष्ट थे कि उनकी बनावट देखकर शोधकर्ताओं को तुरंत अहसास हो गया कि ये किसी आम जानवर के नहीं, बल्कि प्राचीन Homo sapiens (आधुनिक मानव के पूर्वज) के हैं।
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इन पदचिह्नों की उम्र जानने के लिए वैज्ञानिकों ने Optically Stimulated Luminescence (OSL) तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे पता चला कि जिस मिट्टी में ये निशान दबे थे, वह करीब 1,15,000 साल पुरानी है (Oldest human footprints)। यह समय पृथ्वी के Last Interglacial Period का था, जब जलवायु आज की तुलना में ज्यादा नम और अनुकूल थी।
उस दौर में Nefud Desert जैसे इलाके पूरी तरह सूखे नहीं थे। यहां मीठे पानी की झीलें, घास के मैदान और बड़े जानवरों का बसेरा हुआ करता था। यही वजह है कि इंसान और जानवर, दोनों यहां पहुंचे।
हाथी, ऊंट और इंसान – एक ही झील के किनारे
Alathar साइट पर सिर्फ मानव पदचिह्न ही नहीं मिले। वैज्ञानिकों ने उसी परत में हाथियों, ऊंटों, घोड़ों और गाय-बैल जैसे जानवरों के भी पदचिह्न दर्ज किए। इससे साफ होता है कि इस इलाके में पानी की तलाश में अलग-अलग प्रजातियां पहुंचती थीं (Oldest human footprints)।
इंसानों के पदचिह्न जानवरों के निशानों के बेहद करीब पाए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं कि शिकार हो रहा था, बल्कि यह दर्शाता है कि इंसान और जानवर एक ही संसाधन यानी पानी पर निर्भर थे।
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इस खोज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां कोई पत्थर के औजार, आग के निशान या हड्डियां नहीं मिलीं। इसका मतलब साफ है कि यह कोई स्थायी मानव बस्ती नहीं थी।
शोधकर्ताओं के अनुसार, Alathar झील पर इंसानों की मौजूदगी बहुत थोड़े समय के लिए रही होगी। संभव है कि ये लोग पानी पीने या यात्रा के दौरान कुछ समय रुकने आए हों। अध्ययन में साफ कहा गया है कि यह ठहराव पानी से जुड़ा था (Oldest human footprints)।
कभी ग्रीन कॉरिडोर था अरब
यह खोज उस बड़े सिद्धांत को मजबूती देती है, जिसके अनुसार अरब प्रायद्वीप कभी सिर्फ एक सूखा रास्ता नहीं था, बल्कि Africa, Levant और South Asia को जोड़ने वाला एक ग्रीन कॉरिडोर था।
जब-जब जलवायु थोड़ी नम हुई, तब-तब इंसान अफ्रीका से बाहर निकले और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले।
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क्यों खास हैं सबसे पुराने पदचिह्न (Oldest human footprints)?
हड्डियां और औजार बताते हैं कि इंसान वहां रहता था। लेकिन पदचिह्न बताते हैं कि इंसान वहां चला, रुका, और फिर आगे बढ़ गया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, गीली मिट्टी में बने मानव पदचिह्न दो से चार दिन में मिट जाते हैं। Alathar के निशान इतने साफ इसलिए बचे, क्योंकि वे बहुत जल्दी मिट्टी की परत से ढक गए।
Alathar की खोज यह भी संकेत देती है कि यह शायद मानवों की आखिरी यात्राओं में से एक थी, जब जलवायु अनुकूल थी। इसके बाद हालात बदले, झील सूख गई और इंसान आगे बढ़ गए। आज यह जगह फिर से वीरान है।
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