
How to challenge Traffic Challan : अगर आपके मोबाइल पर कभी ट्रैफिक चालान का मैसेज आया हो, तो आपने भी जरूर सोचा होगा कि ये चालान सही है या गलत? कई बार नंबर प्लेट गलत पढ़ ली जाती है, कभी कैमरे की फोटो साफ नहीं होती और कभी गाड़ी उस जगह थी ही नहीं, फिर भी चालान कट जाता है। ऐसे में लोगों के मन में यही सवाल रहता है कि क्या ट्रैफिक चालान को चुनौती दी जा सकती है?
अब इस पर सरकार ने बिल्कुल साफ नियम बना दिए हैं। रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट से जुड़े चालानों को लेकर नई प्रक्रिया और टाइमलाइन नोटिफाई की है, ताकि लोग समय पर चालान भरें और गलत चालान होने पर समय रहते उसे चुनौती भी दे सकें (How to challenge Traffic Challan)।
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि देशभर में ई-चालान का पेमेंट बहुत कम हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में केवल करीब 38% लोग ही ई-चालान भरते हैं। बाकी लोग या तो चालान को नजरअंदाज कर देते हैं या फिर कई बार राज्यों की तरफ से मिलने वाली राहत का इंतजार करते रहते हैं।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर चालान को बार-बार माफ किया जाएगा, तो इलेक्ट्रॉनिक निगरानी सिस्टम लगाने का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि इससे ट्रैफिक नियमों का पालन कराने की कोशिश कमजोर पड़ जाती है।
अब नए नियमों के मुताबिक अगर आपके नाम पर चालान कटता है, तो आपके पास दो ही रास्ते हैं। पहला यह कि आप चालान स्वीकार कर लें और जुर्माना भर दें। दूसरा यह कि आप चालान को चुनौती दें (How to challenge Traffic Challan)। लेकिन यह चुनौती आपको तय समय के अंदर ही देनी होगी।
सरकार ने साफ कर दिया है कि चालान कटने के बाद अगर आपको लगता है कि चालान गलत है, तो आपको 45 दिनों के भीतर इसे contest करना होगा (How to challenge Traffic Challan)। यह प्रक्रिया centralized portal echallan.parivahan.in पर होगी और आपको अपनी बात के साथ सबूत भी अपलोड करना होगा। अगर आप 45 दिन के अंदर चालान को चुनौती नहीं दे पाएंगे, तो इसे माना जाएगा कि आपने चालान स्वीकार कर लिया है और फिर आपको पेमेंट करना ही पड़ेगा।
अगर चालान को चुनौती नहीं दी तो क्या होगा?
अगर आपने 45 दिन में चालान को चुनौती (How to challenge Traffic Challan) नहीं दी, तो इसके बाद आपको चालान का भुगतान अगले 30 दिनों के भीतर करना होगा। यानी चालान जारी होने की तारीख से कुल 75 दिनों के अंदर जुर्माना भरना जरूरी हो जाएगा। सरकार ने यह टाइमलाइन इसलिए बनाई है ताकि चालान को सालों तक लंबित रखने की आदत खत्म हो और ट्रैफिक नियमों को लेकर लोगों में गंभीरता आए।
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पहले व्यवस्था कुछ अलग थी। पहले अगर कोई चालान 90 दिन तक नहीं भरा जाता था, तो वह अपने आप virtual court में चला जाता था। लेकिन उस दौरान एक बड़ी समस्या यह थी कि कई मामलों में चालान कोर्ट में होने के बावजूद भी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी RC और DL से जुड़ी सेवाओं को रोक नहीं पाती थी। जैसे RC transfer, RC renewal, duplicate DL, NOC और PUCC जैसी सुविधाएं चालान लंबित होने के बावजूद चलती रहती थीं।
इसी वजह से लोग चालान को नजरअंदाज कर देते थे और ना पेमेंट करते थे, ना ही कोई आपत्ति (How to challenge Traffic Challan) दर्ज कराते थे। अब नए नियम में सबसे बड़ा बदलाव यही है कि कोई भी चालान अपने आप कोर्ट में नहीं जाएगा। यानी अब सिस्टम ज्यादा सीधा और ज्यादा सख्त बना दिया गया है।
30 दिनों में देना होगा फैसला
अगर आपने चालान को चैलेंज कर दिया है, तो आपकी शिकायत designated authority के पास जाएगी। नए नियम के मुताबिक contest किए गए चालान (How to challenge Traffic Challan) पर अथॉरिटी को 30 दिनों के अंदर फैसला देना होगा। वह आपके दिए हुए सबूत और आपकी बात सुनकर तय करेगी कि चालान सही है या गलत।
अगर अथॉरिटी को आपके सबूत सही लगते हैं, तो वह चालान को रद्द कर सकती है और उसका लिखित आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। लेकिन अगर अथॉरिटी आपकी बात से सहमत नहीं होती, तो उसे भी लिखित कारण बताकर पोर्टल पर आदेश अपलोड करना होगा।
अगर अथॉरिटी ने आपकी अपील रद्द कर दी है, तो आपको उस आदेश के पोर्टल पर अपलोड होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर चालान भरना होगा। यानी अपील रद्द होने के बाद पेमेंट से बचने का रास्ता नहीं रहेगा। हालांकि अगर आप अथॉरिटी के फैसले से भी संतुष्ट नहीं हैं, तो आप कोर्ट में आवेदन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको चालान की रकम का 50% पहले जमा करना होगा। यह नियम इसलिए रखा गया है ताकि लोग बिना वजह हर मामले को लंबा ना खींचें और सिर्फ गंभीर मामलों में ही कोर्ट जाएं।
अगर चुनौती न दी और चालान भी नहीं भरा तो?
अगर कोई व्यक्ति चालान न भरे और न ही कोर्ट जाए (How to challenge Traffic Challan), तो माना जाएगा कि उसने आदेश मान लिया। फिर उसे 15 दिन में चालान भरना होगा। अगर फिर भी पैसा नहीं दिया, तो रोज नोटिस आएगा और गाड़ी या लाइसेंस Not to be Transacted हो जाएगा। मतलब जब तक चालान नहीं भरेगा, तब तक RC-DL के काम जैसे रिन्यूअल या ट्रांसफर रुक सकते हैं।
ये नियम सिर्फ उन चालानों पर लागू है जो ऑनलाइन या मौके पर भरे जा सकते हैं। जो चालान कोर्ट वाले होते हैं, उनका फैसला कोर्ट में ही होगा। सरकार आगे कुछ कोर्ट वाले चालानों को भी सामान्य चालान बनाने की तैयारी में है।
सरकार ने बताया है कि अब यूनिफॉर्म में पुलिस या राज्य/UT के अधिकृत अधिकारी चालान काट सकते हैं। चालान कागज वाला भी हो सकता है और ऑनलाइन भी। कई जगहों पर कैमरे से अपने आप चालान भी बन जाता है।
चालान भेजने का समय भी तय है। Physical challan 15 दिन में और e-challan 3 दिन में आपके पास पहुंच जाएगा, ताकि आप समय पर पेमेंट कर सकें या उसे चुनौती दे पाएं।
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