
Saudi Arabia wants more attacks on iran : पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सऊदी अरब ने अमेरिका से खुलकर कहा है कि वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करे।
इस बीच UAE ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के लिए होने वाले प्रयासों का हिस्सा बनना चाहता है। बताया जा रहा है कि होर्मुज को खुलवाने के लिए कुछ देश मिलकर फोर्स बना सकते हैं। UAE इसका हिस्सा बनना चाहता है।
ये बातें ऐसे समय आई हैं, अमेरिका कह रहा है कि उसने ईरान के पास शांति वार्ता की शर्तें भेजी हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और 15 दिनों के लिए टाल दिए हैं।
मोहम्मद बिन सलमान और ट्रंप की बातचीत
विदेशी मीडिया के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Mohammed bin Salman) ने कथित तौर पर डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान को अधूरा न छोड़ा जाए (Saudi Arabia wants more attacks on iran)। उनके अनुसार, यह मिडिल ईस्ट को नए सिरे से ढालने का ऐतिहासिक मौका हो सकता है।
हालांकि अभी तक सऊदी अरब सीधे तौर पर युद्ध में शामिल नहीं हुआ है, लेकिन संकेत साफ हैं कि वह हर विकल्प पर विचार कर रहा है। सऊदी विश्लेषकों का कहना है कि अगर शांति वार्ता असफल होती है, तो रियाद सैन्य कदम उठा सकता है।
ईरान के हमलों से परेशान सऊदी अरब
इस संघर्ष में ईरान ने सऊदी अरब को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हाल ही में यनबू (Yanbu) के एक ऑयल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला हुआ, जो सऊदी अर्थव्यवस्था के लिए अहम है।
सबसे बड़ा खतरा है हूती विद्रोहियों का, जो यमन में ईरान का समर्थक है। अगर हूती विद्रोही इस युद्ध में खुलकर शामिल होते हैं, तो सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। इसी वजह से सऊदी अरब चाहता है कि ईरान को जवाब दिया जाए (Saudi Arabia wants more attacks on iran)।
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होर्मुज और तेल संकट
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ रहा है। Strait of Hormuz, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, लगभग ठप होने की स्थिति में है।
UAE ने तो यहां तक कह दिया है कि सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं है, बल्कि ईरान को निर्णायक रूप से हराना जरूरी है। यूएई एक Hormuz Security Force बनाने की भी बात कर रहा है, जिससे इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित किया जा सके।
बहुत पुरानी है यह अदावत
सऊदी अरब और ईरान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी रही है। एक तरफ सऊदी खुद को सुन्नी मुस्लिम दुनिया का नेता मानता है, तो दूसरी ओर ईरान शिया नेतृत्व का दावा करता है (Saudi Arabia wants more attacks on iran)।
लेकिन 2023 में दोनों देशों ने चीन की मध्यस्थता में संबंध सुधारने का समझौता किया था। इसके पीछे सऊदी रणनीति थी कि ईरान को करीब रखकर संघर्ष से बचा जाए। लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस रणनीति को कमजोर कर दिया है।



