
Usman Tariq Action Controversy : पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में पाकिस्तान के ऑफ स्पिनर उस्मान तारिक के बॉलिंग एक्शन को लेकर फिर विवाद खड़ा हो गया है। कराची में खेले गए मैच के दौरान डैरिल मिचेल दो बार विकेट के सामने से हट गए। उन्होंने अंपायर से शिकायत की, तारिक लंबा पॉज ले रहे हैं।
टी-20 विश्व कप के दौरान रविचंद्रन अश्विन ने टीम इंडिया को सलाह दी थी कि पाकिस्तान के खिलाफ तारिक को खेलते हुए इंडियन बैटर्स को क्रीज से हट जाना चाहिए। अश्विन के मुताबिक, अगर बैटर को पता नहीं कि गेंदबाज कब बॉल डालेगा, तो सामने से हटना उसका हक है (Usman Tariq Action Controversy)।
भारतीय बल्लेबाजों ने तो ऐसा नहीं किया, पर PSL में डैरिल मिचेल ने कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। लोग कहने लगे कि मिचेल ने अश्विन की सलाह मानकर ऐसा किया है।
चर्चा तब और बढ़ गई, जब अश्विन ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज डैरिल मिचेल की रणनीति का समर्थन किया (Usman Tariq Action Controversy)।
अश्विन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर गेंदबाज के रन-अप में आने वाला पॉज हर गेंद पर एक जैसा नहीं है, तो बल्लेबाज को हटने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि कप्तानों और बल्लेबाजों को मैच शुरू होने से पहले यह मुद्दा अंपायर और मैच रेफरी के सामने उठाना चाहिए। अश्विन ने अपने पोस्ट में डैरिल मिचेल की तारीफ भी की (Usman Tariq Action Controversy)।
उस्मान तारिक का जवाब
अश्विन के बयान के बाद उस्मान तारिक ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेट नियमों में अनस्पोर्टिंग कंडक्ट का हवाला देते हुए कहा कि अगर बल्लेबाज जानबूझकर लगातार ऐसा करता है ताकि गेंदबाज का ध्यान भटके या समय बर्बाद हो, तो अंपायर उसे चेतावनी दे सकते हैं (Usman Tariq Action Controversy)।
उन्होंने आगे कहा कि अगर यह जारी रहता है तो फील्डिंग टीम को पांच पेनल्टी रन भी दिए जा सकते हैं। इसके साथ उन्होंने टिप्पणी की, ‘5 पेनल्टी रन सुनकर खुशी हुई, जारी रखो।’
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पहले भी उठ चुके हैं सवाल
उस्मान तारिक के बॉलिंग एक्शन पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। उनके एक्शन में रन-अप के दौरान रुकना और फिर साइड-आर्म रिलीज शामिल है। ICC Men’s T20 World Cup 2026 के दौरान भी उनके एक्शन पर बहस हुई थी (Usman Tariq Action Controversy)।
हालांकि अब तक उनके खिलाफ किसी आधिकारिक प्रतिबंध की जानकारी सामने नहीं आई है।
इस विवाद के बाद क्रिकेट नियमों और खेल भावना पर फिर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अंतिम फैसला मैदान पर मौजूद अंपायरों और मैच अधिकारियों का होता है।
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