
Ganga Saptami : हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी का पर्व बेहद पवित्र, शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन मां गंगा के फिर से प्रकट होने का उत्सव माना जाता है, इसलिए इसे गंगा जन्मोत्सव भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मां गंगा भगवान शिव की जटाओं में समाई थीं। यही कारण है कि इस दिन गंगा माता और भगवान शिव दोनों की पूजा का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) पर श्रद्धा से पूजा करने, गंगाजल अर्पित करने और शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
Ganga Saptami कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। साल 2026 में सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।
सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी।
गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) क्यों मनाई जाती है?
गंगा सप्तमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और मोक्ष का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां गंगा पहले स्वर्ग लोक में विराजमान थीं। राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए कठोर तप किया, तब मां गंगा को पृथ्वी पर आने के लिए तैयार किया गया।
लेकिन गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि धरती उसे सहन नहीं कर सकती थी। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और उनके प्रवाह को नियंत्रित किया। बाद में उचित समय आने पर शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं से पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी पुनः प्रकट होने की घटना को गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) के रूप में मनाया जाता है।
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गंगा सप्तमी पर शिव पूजा का विशेष महत्व
गंगा और शिव का संबंध अटूट माना गया है। इसलिए इस दिन (Ganga Saptami) शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव के साथ मां गंगा की कृपा भी प्राप्त होती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया जलाभिषेक कई गुना फल देता है।
जो लोग मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी, ग्रह दोष या जीवन में रुकावटों से परेशान हैं, उनके लिए गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) का दिन विशेष लाभकारी माना गया है।
गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) पर शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं ये 5 चीजें
गंगाजल : चांदी या तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे मन को शांति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
काले तिल : गंगाजल में थोड़े काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे पितृ दोष शांत होता है और पुराने रोगों से राहत मिलने की मान्यता है।
बिल्व पत्र : गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) पर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए तीन दल वाला बिल्व पत्र अर्पित करें। इससे करियर और कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर होती हैं।
शमी पत्र : भगवान शिव को शमी पत्र प्रिय माना जाता है। इसे चढ़ाने से शनि दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
सफेद चंदन : अभिषेक के बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं। इससे आर्थिक तंगी दूर होती है और घर में समृद्धि आती है।
गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर जाएं या घर के शिवलिंग के सामने उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
सबसे पहले सामान्य जल से अभिषेक करें। फिर पंचामृत से स्नान कराएं और अंत में शुद्ध गंगाजल की धार बनाते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद फूल, बेलपत्र, शमी पत्र और चंदन चढ़ाएं। दीपक जलाकर भगवान शिव और मां गंगा का ध्यान करें।
गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) के मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु॥
गंगाधराय नमः तुभ्यं, संस्थितोऽसि जटाधरे।
अर्घ्यं गृहाण देवेश, गंगापुत्र नमोऽस्तु ते॥
गंगा सप्तमी पर दान का महत्व
गंगा सप्तमी (Ganga Saptami) के दिन पूजा के बाद जल, सत्तू, फल, वस्त्र और जरूरतमंदों को भोजन का दान करना बेहद पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
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