Donald Trump claim on Iran wrong : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अब ज्यादातर बातों पर दुनिया यकीन नहीं करती। उनके दावे अक्सर गलत साबित होते हैं। कई बार तो वह अपनी ही बात को काटते नजर आते हैं।
इस बार अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन की खुफिया शाखा की एक नई रिपोर्ट ने ही ट्रंप की पोल खोल दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य क्षमता अब भी काफी हद तक मजबूत बनी हुई है। यह निष्कर्ष ट्रंप के इस दावे के बिल्कुल विपरीत है कि ईरान की सैन्य क्षमता खत्म हो चुकी है (Donald Trump claim on Iran wrong)।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने पहले कहा था कि ईरान की सेना को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि ईरान की एयर फोर्स और नौसेना लगभग खत्म हो चुकी हैं।
लेकिन पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट इन दावों से सहमत नहीं है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ईरान अब भी एक शक्तिशाली क्षेत्रीय ताकत बना हुआ है और उसकी प्रमुख सैन्य क्षमताएं बरकरार हैं (Donald Trump claim on Iran wrong)।
ट्रंप ने बढ़ाया युद्ध विराम
इसी बीच ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध विराम को अनिश्चित समय के लिए बढ़ाने की घोषणा की। यह फैसला उस समय आया जब युद्ध विराम की समय-सीमा खत्म होने वाली थी।
ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से एक संभावित सैन्य कार्रवाई को टालने के लिए अपील की गई थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीतिक नाकेबंदी जारी रखने का संकेत भी दिया है।
अमेरिका के इस कदम पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद अध्यक्ष के सलाहकार Mahdi Mohammadi ने युद्ध विराम बढ़ाने के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक और सैन्य घेराबंदी, बमबारी से अलग नहीं है और इसका जवाब सैन्य रूप से दिया जाना चाहिए। उनके बयान से साफ है कि तेहरान इस फैसले को रणनीतिक चाल के रूप में देख रहा है।
रिपोर्ट का क्या होगा असर (Donald Trump claim on Iran wrong)
पेंटागन की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि ईरान को पूरी तरह सैन्य रूप से कमजोर करना अभी संभव नहीं हुआ है। यही वजह है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए यह स्थिति रणनीतिक चुनौती बनी हुई है।
यह रिपोर्ट अमेरिका की नीति और उसकी सार्वजनिक रणनीति पर भी सवाल खड़े करती है। एक तरफ अमेरिका ईरान को कमजोर बताता रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी अपनी खुफिया एजेंसियां कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही हैं (Donald Trump claim on Iran wrong)।



