
BJP rise in West Bengal election : पश्चिम बंगाल में हमेशा से एक दल का दबदबा रहा है। पहले यह राज्य लेफ्ट के पास था, जिसने 34 सालों तक राज किया। उस दौर में कोई सोच भी नहीं सकता था कि कभी लाल सूरज अस्त होगा।
उस दौर में ममता बनर्जी ने खूब संघर्ष किया। आखिरकार 2011 में जाकर उनकी TMC ने जीत दर्ज की। इसके बाद अगले 15 साल तक दीदी का राज चला और उन्होंने किसी दल को खड़ा नहीं होने दिया।
अब BJP ने कहानी पलट दी है। एक ही पार्टी के लंबे शासन के लिए पहचाने जाने वाला यह राज्य अब प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर चुका है (BJP rise in West Bengal election)। 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी महज 3 सीटों और करीब 3% वोट शेयर तक सीमित थी।
2021 में बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर 38% से अधिक वोट शेयर हासिल किया और मुख्य विपक्षी दल बन गई। इस बार पार्टी ने पूर्ण बहुमत साबित कर लिया। टीएमसी की सीटें कम हुई हैं, लेकिन वह पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। इसका मतलब कि अब वहां दो बड़े दलों की जगह बन गई है।
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BJP ने कैसे बनाई जीत की राह (BJP rise in West Bengal election)
ममता बनर्जी बदलाव का वादा कर सत्ता में आई थीं। लेकिन वह अपने वादे से दूर जाती दिखीं। औद्योगिक विकास, रोजगार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने से जनता के एक हिस्से में असंतोष पनपने लगा। बीजेपी ने इसी का फायदा उठाया।
पिछले पांच साल में पार्टी ने अपना संगठन गांव-गांव तक फैलाया है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे बड़े नेताओं की लगातार रैलियों और अभियानों ने पार्टी को नई ऊर्जा दी (BJP rise in West Bengal election)। टीएमसी और लेफ्ट के कई बड़े चेहरे भी BJP में शामिल हुए हैं।
बीजेपी ने अपने चुनावी अभियान में तुष्टिकरण की राजनीति को बड़ा मुद्दा बनाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है। राजनीतिक हिंसा भी बड़ा मुद्दा बनी। पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज्य में कई जगह हिंसा हुई थी। वे यादें भी जनता के मन में ताजा होंगी।
बीजेपी ने करप्शन को भी उठाया। ममता बनर्जी की छवि भले साफ हो, पर उनके कई नेता विवादों में रहे हैं। भ्रष्टाचार के आरोप कई नेताओं पर लगे हैं (BJP rise in West Bengal election)।
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घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा भी इस चुनाव में अहम रहा। बीजेपी ने इसे स्थानीय लोगों के रोजगार और संसाधनों से जोड़कर पेश किया। सीमावर्ती और उत्तर बंगाल के इलाकों में यह मुद्दा काफी प्रभावी साबित हुआ।
बीजेपी ने युवाओं और महिलाओं पर फोकस किया। चुनाव के पहले महिला आरक्षण का दांव चला। पार्टी ने युवा वर्ग की नब्ज पकड़ी, जिसे रोजगार और बेहतर शिक्षा चाहिए (BJP rise in West Bengal election)। अब बीजेपी के सामने इन उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी।



