
Ayodhya Verdict Paved Way for Bhojshala : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना है। अदालत के इस फैसले के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचने लगे हैं और वहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। कई लोगों ने इसे हिंदू समाज और सनातन संस्कृति की बड़ी जीत बताया है।
फैसले के बाद भोजशाला परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने खुशी जाहिर की। एक श्रद्धालु ने कहा कि कई वर्षों बाद बिना किसी बाधा के दर्शन करने का अवसर मिला है और अब वे रोज यहां पूजा करने आएंगे।
श्रद्धालुओं ने अदालत के फैसले को हिंदू और सनातन संस्कृति की जीत बताया। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक स्थल का मुद्दा नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आस्था का प्रश्न था। श्रद्धालु इस बात से उत्साहित हैं कि विवाद का रास्ता अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict Paved Way for Bhojshala) से निकला।
अदालत ने किन आधारों पर दिया फैसला?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में Archaeological Survey of India यानी ASI की रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और साहित्यिक साक्ष्यों का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि भोजशाला का संबंध परमार वंश के राजा राजा भोज से जुड़ा हुआ है और यहां मां सरस्वती को समर्पित मंदिर तथा संस्कृत शिक्षा केंद्र होने के प्रमाण मिलते हैं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या फैसले (Ayodhya Verdict Paved Way for Bhojshala) में अपनाए गए सिद्धांतों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पुरातत्व केवल खुदाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इतिहास, साहित्य और अन्य स्रोतों की बहु-विषयक व्याख्या भी शामिल होती है।
अदालत ने 2003 में जारी ASI के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा की अनुमति दी गई थी, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत थी।
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अब अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को निर्देश दिया है कि भोजशाला को एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के रूप में संचालित और संरक्षित किया जाए (Ayodhya Verdict Paved Way for Bhojshala)।
फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए धार जिले में किसी अन्य स्थान पर मस्जिद निर्माण हेतु वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है। याद रहे कि इसी तरह का फैसला अयोध्या में भी आया था (Ayodhya Verdict Paved Way for Bhojshala)।
भोजशाला का इतिहास क्यों है खास?
भोजशाला को राजा भोज के समय का महत्वपूर्ण शिक्षा और संस्कृति केंद्र माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यहां संस्कृत और विद्या का अध्ययन होता था तथा मां सरस्वती की पूजा की जाती थी। इसी कारण इसे मां वाग्देवी का स्थान भी कहा जाता है।
वर्षों से यह स्थल हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के दावे का केंद्र रहा है, जिस कारण यहां धार्मिक और कानूनी विवाद चलता रहा।
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