
Dhanteras Puja Muhurat : uplive24.com पर जानिए धनतेरस की आरती लाइव समय, पूजा विधि, खरीदारी मुहूर्त, वाहन खरीदने का शुभ समय और मां लक्ष्मी-कुबेर की आरती लिरिक्स। इस दिन धन्वंतरि भगवान की पूजा से धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
Dhanteras Puja Muhurat : धनतेरस दीपावली महोत्सव की शुरुआत का पहला दिन होता है। इस साल धनतेरस का शुभ पर्व 18 अक्टूबर (शनिवार) को मनाया जा रहा है। यह दिन धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि जी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
धनतेरस का महत्व (Significance of Dhanteras 2025)
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है (Dhanteras Puja Muhurat)। इस दिन घरों में दीप जलाकर अंधकार को दूर करने और धन की देवी लक्ष्मी का स्वागत करने की परंपरा है। यह त्योहार न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धता का भी प्रतीक माना गया है।
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धनतेरस पर खरीदारी का महत्व (Dhanteras Shopping Significance)
धनतेरस पर खरीदारी को शुभ और मंगलकारी माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन खरीदी गई चीजें पूरे वर्ष शुभ फल देती हैं।
सोना या चांदी के सिक्के खरीदना लक्ष्मी कृपा प्राप्ति का प्रतीक है।
पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन खरीदना शुद्धता और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
नई झाड़ू खरीदना घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को दूर करता है।
मोबाइल, लैपटॉप, टीवी, वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरण इस दिन खरीदना शुभ फलदायी माना जाता है।
वाहन खरीदना भी परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है, हालांकि इस साल के लिए खास बात यह है कि शुभ मुहूर्त (Dhanteras Puja Muhurat) बाद में उपलब्ध हैं।
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द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल धनतेरस से लेकर भाई दूज तक वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। हालांकि, अक्तूबर के अंत में कुछ विशेष शुभ समय उपलब्ध रहेंगे।
- 24 अक्तूबर 2025 (शुक्रवार) सुबह 06:28 बजे से 25 अक्तूबर 01:19 बजे तक
- 29 अक्तूबर 2025 (बुधवार) शाम 17:29 बजे से 30 अक्तूबर सुबह 06:32 बजे तक
- 30 अक्तूबर 2025 (गुरुवार) सुबह 06:32 बजे से 10:06 बजे तक
- 31 अक्तूबर 2025 (शुक्रवार) सुबह 10:03 बजे से 1 नवंबर 06:33 बजे तक
धनतेरस चौघड़िया मुहूर्त (Dhanteras Choghadiya Muhurat)
दिन का चौघड़िया
- शुभ-उत्तम : प्रातः 07:49 से 09:15 तक
- लाभ-उन्नति : दोपहर 01:32 से 02:57 तक
- अमृत-सर्वोत्तम : दोपहर 02:57 से सायं 04:23 तक
- चर काल : दोपहर 12:06 से 01:32 तक
रात्रि का चौघड़िया
- लाभ-उन्नति : सायं 05:54 से 07:28 तक
- शुभ-उत्तम : रात्रि 09:02 से 10:36 तक
- अमृत-सर्वोत्तम : रात्रि 10:36 से 19 अक्टूबर को 12:10 तक
- लाभ-उन्नति : प्रातः 04:52 से 19 अक्टूबर को 06:26 तक
धनतेरस आरती का समय (Dhanteras 2025 Aarti Time)
धनतेरस की आरती का शुभ समय शाम 07:16 से 08:20 बजे तक है। इस समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान गणेश की आरती करने से घर में सुख, समृद्धि और आरोग्य की वृद्धि होती है। (Dhanteras Puja Muhurat)
- भगवान गणेश की आरती – कार्य सिद्धि और शुभता के लिए
- भगवान धन्वंतरि की आरती – उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए
- मां लक्ष्मी की आरती – धन और समृद्धि की कृपा के लिए
- कुबेर देव की आरती – आर्थिक उन्नति और सफलता के लिए
भगवान धन्वंतरि मंत्र
ओम नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोग निवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नम:
(Dhanteras Puja Muhurat)
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धनतेरस के दिन मंत्र-जप
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
कमलगट्टे की माला से 108 बार जप करें.
धनतेरस की आरती (Dhanteras Ki Aarti)
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख-संपति दाता।
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भव निधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
जिस घर तुम रहती हो, तांहि में हैं सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। (Dhanteras Puja Muhurat)
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