ढुण्डिराज चतुर्थी (Dhundiraj Chaturthi) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। इसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई प्रार्थना जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है।
ढुण्डिराज चतुर्थी की तिथि (Dhundiraj Chaturthi)
इस वर्ष ढुण्डिराज चतुर्थी (Dhundiraj Chaturthi) 21 फरवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 20 फरवरी 2026 को दोपहर 2:37 बजे से शुरू होकर 21 फरवरी 2026 को दोपहर 1:00 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 21 फरवरी को पूरे देश में यह पर्व मनाया जाएगा।
इस दिन (Dhundiraj Chaturthi) शुभ, शुक्ल और रवि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा देता है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं –
- ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 5:13 बजे से 6:04 बजे तक
- विजय मुहूर्त : दोपहर 2:28 बजे से 3:14 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त : शाम 6:13 बजे से 6:38 बजे तक
- निशिता मुहूर्त : रात्रि 12:09 बजे से 1:00 बजे तक
रवि योग शाम 7:07 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि शुक्ल योग पूरे दिन और रात रहेगा। इन शुभ समयों में गणेश जी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।
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क्यों मनाई जाती है ढुण्डिराज चतुर्थी (Dhundiraj Chaturthi)
ढुण्डिराज चतुर्थी (Dhundiraj Chaturthi) भगवान गणेश के ढुण्डिराज स्वरूप की पूजा से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
मत्स्य पुराण में इस व्रत को मनोरथ चतुर्थी कहा गया है और बताया गया है कि इस दिन किया गया व्रत विशेष फल देता है। वहीं Varaha Purana में इसे अविघ्नकर व्रत कहा गया है।
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मान्यता है कि राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ की सफलता के लिए, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले और भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन से पहले इस व्रत का पालन किया था। इससे इस व्रत (Dhundiraj Chaturthi) की महिमा और अधिक बढ़ जाती है।
ढुण्डिराज चतुर्थी (Dhundiraj Chaturthi) का धार्मिक महत्व
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। इसलिए यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो नई शुरुआत कर रहे हैं – जैसे नया व्यवसाय, शिक्षा, नौकरी या विवाह।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है, बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।
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