
Bharat Shiksha Samman
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कवि, लेखक और राजनयिक अभय के. को भारत शिक्षा सम्मान 2025 (Bharat Shiksha Samman) से सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम बालाजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था, जहां देश के जाने-माने लोग मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी ने अभय के. को यह पुरस्कार सौंपा। इस अवसर पर देश के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी भी मंच पर मौजूद थे।
अभय के. को यह सम्मान (Bharat Shiksha Samman) भारतीय संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए दिया गया है। यह सम्मान उस स्थायी समर्पण और दूरदर्शिता का प्रतीक है, जिसके जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सृजनात्मक छवि को मजबूती दी है।
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अभय के. की रचनात्मक यात्रा और उपलब्धियां (The creative journey and achievements of Abhay K.)
अभय के. एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। वह कवि, संपादक, अनुवादक, कलाकार और राजनयिक हैं। उनकी चर्चित किताब ‘नालंदा : हाउ इट चेंज्ड द वर्ल्ड’ के अलावा उन्होंने कई कविता संग्रह भी लिखे हैं। वह ‘100 महान भारतीय कविताएं’ पुस्तक के संपादक हैं, जिसमें 28 भारतीय भाषाओं की कविताओं को संकलित किया गया है। इस पुस्तक का कई अंतरराष्ट्रीय भाषाओं – स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी, इतालवी, पुर्तगाली और ग्रीक में अनुवाद हो चुका है।
उनकी कविताएं 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके द्वारा रचित पृथ्वी गान का 160 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उनकी काव्य पुस्तकों का भी कई भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन हुआ है, जिनमें पुर्तगाली, फ्रेंच, रूसी, ओडिया और रोमानियाई प्रमुख हैं।
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सम्मान और अंतरराष्ट्रीय पहचान
उन्हें 2013 में SAARC साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया था और अमेरिका की लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में अपनी कविताएं रिकॉर्ड करने के लिए आमंत्रित किया गया था। संस्कृत से उनके कालिदास की रचनाओं के अनुवाद को KLF पोएट्री बुक ऑफ द ईयर अवार्ड भी मिला है। मगही के प्रसिद्ध उपन्यास फूल बहादुर का उनका हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद पेंगुइन रैंडम हाउस ने प्रकाशित किया है।
एक कलाकार के रूप में अभय के. (Abhay K. as an artist)
अभय के. की कला यात्रा 2005 में रूस की राजधानी मास्को से शुरू हुई थी। तब से वे पेरिस, ब्रासीलिया, नई दिल्ली और एंटानानारिवो सहित कई देशों में अपनी कलाकृतियाँ प्रदर्शित कर चुके हैं। उनकी पेंटिंग्स ‘शून्यता’ के बौद्ध दर्शन पर आधारित हैं, जिन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय, बिहार संग्रहालय, सालार जंग म्यूज़ियम और नई दिल्ली की एलायंस फ्रैंसेस आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया गया है।
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इनको भी मिला Bharat Shiksha Samman
इस वर्ष भारत शिक्षा सम्मान (Bharat Shiksha Samman) प्राप्त करने वालों में मशहूर शायर वसीम बरेलवी, उद्योगपति और सांसद नवीन जिंदल, इतिहासकार विक्रम संपत, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रमा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के डायरेक्टर प्रो. राम सिंह और इग्नू की प्रो. कौशल पंवार शामिल हैं।



