
Diwali Lakshmi Puja : दीपावली का पर्व हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और शुभ त्योहार माना जाता है। यह सिर्फ रोशनी का नहीं, बल्कि उम्मीद, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, और नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।
इसके अलावा, एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक अमावस्या (Kartik Amavasya) के दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) का प्रकट होना हुआ था। इसलिए इस दिन को धन, सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का महत्व (Diwali Lakshmi Puja)
दीपावली के दिन घर-घर में महालक्ष्मी पूजा (Diwali Lakshmi Puja) का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और उन घरों में स्थायी रूप से निवास करती हैं जहां स्वच्छता, साज-सज्जा और श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है।
इसलिए दीपावली पर लोग अपने घरों, दुकानों और दफ्तरों को रोशनी, फूलों और रंगोली से सजाते हैं ताकि मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में धन-धान्य की वर्षा करें।
दिवाली लक्ष्मी पूजन मुहूर्त (Diwali Lakshmi Puja Muhurat)
इस वर्ष अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर 2025 को शाम 03:44 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2025 को शाम 05:54 तक रहेगी।
लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ समय प्रदोष काल (Pradosh Kaal) और निशीथ काल (Nishita Kaal) माना गया है।
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मुख्य पूजन मुहूर्त
- लक्ष्मी पूजा (Laxmi Puja) – शाम 07:08 PM से 08:18 PM तक
- प्रदोष काल (Pradosh Kaal) – 05:46 PM से 08:18 PM तक
- वृषभ लग्न (Vrishabha Lagna) – 07:08 PM से 09:03 PM तक
- निशीथ काल पूजा (Nishita Kaal Puja) – रात्रि 11:41 PM से 12:31 AM तक
- ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat, 21 Oct) – सुबह 03:55 AM से 05:25 AM तक
ऑफिस, दुकान और प्रतिष्ठान के लिए लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (Diwali Lakshmi Puja)
- ऑफिस के लिए (लाभ काल) – दोपहर 3:30 PM से 5:00 PM
- छात्रों के लिए (अमृत काल) – शाम 5:00 PM से 6:30 PM
- गृहस्थ, किसान, व्यापारी – 7:32 PM से 9:28 PM
- नए व्यापारी – 5:55 PM से 7:25 PM
- परंपरागत व्यापारी – रात 3:25 AM से 4:55 AM
- साधक – रात 12:25 AM से 1:55 AM
दिवाली पूजा विधि (Diwali Lakshmi Puja)
- दिवाली की सुबह अपने घर, दुकान और ऑफिस को अच्छी तरह से साफ करें।
- रंगोली, फूलों और लाइट्स से पूजा स्थल को सजाएँ।
- माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की मूर्तियां स्थापित करें।
पूजा सामग्री : अष्टगंध, अक्षत, फूल, मिठाई, खील, बताशा और फल अर्पित करें।
बही खाते की पूजा (Account Book Puja) : बही खाते या कैश बुक पर स्वास्तिक और शुभ-लाभ का चिन्ह बनाकर लक्ष्मी मां से समृद्धि की प्रार्थना करें।
आरती और दीपदान : अंत में आरती करें और दीपक जलाकर मां लक्ष्मी से घर-परिवार की उन्नति और व्यवसाय की वृद्धि की कामना करें।



