वैदिक पंचांग के अनुसार मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) का पावन अवसर है। हिंदू धर्म में हर अमावस्या का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यह तिथि फाल्गुन मास में आती है तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और बढ़ जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों – विशेषकर गंगा में स्नान कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। तीर्थ स्थलों, खासकर त्रिवेणी संगम पर जप, दान और तर्पण का विशेष महत्व माना जाता है।
मान्यता है कि फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए अनुष्ठान से पितृ दोष में कमी आती है, पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं फाल्गुन अमावस्या 2026 के प्रमुख पूजा-विधि और 5 असरदार उपाय।
फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) पर स्नान और शिव पूजन का महत्व
फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) के दिन प्रातःकाल किसी पवित्र नदी या जलतीर्थ में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से गंगा स्नान को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला कहा गया है। स्नान के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। यदि संभव हो तो गंगाजल से अभिषेक करते समय मां गंगा के पवित्र नामों का जप करें।
भक्ति भाव से किया गया शिव पूजन मन को शांति देता है और नकारात्मक ऊर्जा को कम करने में सहायक माना जाता है।
तर्पण और पिंडदान से पितृ शांति
फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन तिल, कुश, पुष्प और जल अर्पित करते हुए पूर्वजों का स्मरण करना शुभ फलदायी माना गया है। यदि संभव हो तो किसी तीर्थ स्थान पर तर्पण और पिंडदान करें।
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितृ सूक्त या पितृ स्तोत्र का पाठ करने से पितृ दोष के प्रभाव में कमी आती है और परिवार पर पूर्वजों की कृपा बनी रहती है। श्रद्धा से किया गया यह अनुष्ठान मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
यह भी पढ़ें : Pitru Dosh : क्यों सबसे खतरनाक कहा जाता है पितृ दोष, कैसे मिलेगा छुटकारा?
दक्षिण दिशा में दीप जलाने का उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार घर की दक्षिण दिशा पितरों से संबंधित मानी जाती है। फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) के दिन इस दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाकर पूर्वजों का स्मरण करें। यह सरल उपाय पारिवारिक कलह को कम करने और घर में शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
पीपल पूजन से दूर हों बाधाएं
पीपल वृक्ष को देववृक्ष कहा गया है। मान्यता है कि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है तथा पितरों का भी निवास माना जाता है। अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। श्रद्धा और नियम से किया गया यह उपाय जीवन की बाधाओं और नकारात्मक प्रभावों को कम करने वाला माना जाता है।
यह भी पढ़ें : Sarva Pitru Amavasya : इस एक तर्पण से संतुष्ट हो जाते हैं सारे पितर
फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) पर दान का महत्व
इस दिन स्नान के बाद दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। जरूरतमंदों या योग्य ब्राह्मण को तिल, वस्त्र, अन्न, गुड़, घी, काला छाता, काले जूते और धन का दान किया जा सकता है। मान्यता है कि अमावस्या पर किया गया दान जीवन के कष्टों को कम करता है और पुण्यफल प्रदान करता है।
आर्थिक समृद्धि के लिए विशेष उपाय
फाल्गुन अमावस्या (Falgun Amavasya) को धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा भी शुभ मानी गई है। इस दिन घर की साफ-सफाई करें, मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और घर के किसी कोने में अंधेरा न रहने दें। माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करने से आर्थिक बाधाएं दूर होने और सुख-समृद्धि बढ़ने की मान्यता है।
जोड़ियां क्या वाकई ऊपर से बनकर आती हैं?


