
जब से रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ है, भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए बार-बार निशाना बनाया गया है, विशेषकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा। लेकिन अब भारत ने पहली बार इस पर सीधी और सार्वजनिक प्रतिक्रिया (India hits back Trump) दी है। और वह भी बिल्कुल सटीक और तीखी।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जैसे किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था को अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा करनी होती है, वैसे ही भारत ने सस्ती ऊर्जा की जरूरतों के तहत रूस से कच्चा तेल आयात किया है।
MEA के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने दो टूक (India hits back Trump) कहा, ‘जो देश भारत को नसीहत दे रहे हैं, वही खुद भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि भारत के लिए यह एक राष्ट्रीय आवश्यकता है, लेकिन उनके लिए यह केवल मुनाफा कमाने का जरिया है।’
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अमेरिका का दोहरा मापदंड
विदेश मंत्रालय के जवाब (India hits back Trump) ने अमेरिका के दोहरे मापदंड को उजागर किया है। भारत पर आरोप लगाने वाले अमेरिका ने खुद 2024 में रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम, और फर्टिलाइज़र जैसे सामान आयात किए। यहां तक कि 2022 में अमेरिका ने भारत को प्रोत्साहित किया था कि वह रूस से तेल खरीदे ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रह सके। अब वही अमेरिका, खासकर ट्रंप, भारत पर 25% टैरिफ और रूस से व्यापार पर अतिरिक्त टैक्स की धमकी दे रहे हैं।
यूरोपीय संघ का दिखावा
यूरोपीय यूनियन भी भारत को रूसी तेल से दूरी बनाने की सलाह देता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही सच बताते हैं। 2024 में EU और रूस के बीच 67.5 बिलियन यूरो का माल व्यापार हुआ, जबकि सेवाओं में भी 17.2 बिलियन यूरो का व्यापार हुआ। यही नहीं, LNG आयात भी रिकॉर्ड 16.5 मिलियन टन तक पहुंच गया।
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ट्रंप का भारत विरोध और नोबेल का सपना
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर आरोप लगाया कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे फिर से बेचना चाहता है और इस तरह मुनाफा कमा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को इस बात की परवाह नहीं है कि ‘यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं।’
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नाराजगी भारत के साथ ट्रेड डील ना होने और रूस से तेल खरीद जारी रखने को लेकर है। वह अब अपने पुराने, निराधार दावों को भी उछाल रहे हैं – जैसे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने में भूमिका निभाई थी। उनका सपना है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिल जाए।
भारत ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। और अब जब ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘पहले दिन खत्म’ करने का अपना वादा पूरा नहीं कर पा रहे हैं, वह भारत के नाम पर फिर से अपने पुराने दावों को दोहराकर खुद को वैश्विक नेता दिखाना चाहते हैं।
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Tarriff है ट्रंप का हथियार
Trump टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं – कभी व्यापारिक सौदे में दबाव के लिए, तो कभी किसी सरकार को झुकाने के लिए। BRICS को भी वह अमेरिकी मुद्रा की बादशाहत के लिए खतरा मानते हैं।
भारत ने सही वक्त पर दिया करारा जवाब (India hits back Trump)
MEA के अनुसार, भारत ने रूस से तेल आयात तभी शुरू किया जब पारंपरिक आपूर्तियां यूरोप की तरफ मोड़ दी गई थीं। आज भारत रूस से हर दिन 1.8 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल मंगा रहा है। यह पहले के सिर्फ 2.5% से बढ़कर अब कुल आयात का 39% हो चुका है। यह व्यापार भारत की जरूरत है।
भारत का साफ संदेश है – अगर अमेरिका और यूरोप खुद को नैतिकता का ठेकेदार समझते हैं, तो पहले खुद अपनी ट्रेड शीट पर नजर डालें।
भारत अब वैश्विक मंच पर दबाव में आने वाला खिलाड़ी नहीं रहा। ट्रंप जैसे नेताओं की धमकियों और यूरोप की चालाकी भरी आलोचना के बीच, भारत ने जिस आत्मविश्वास से जवाब दिया है, वह न सिर्फ कूटनीतिक रूप से मजबूत है, बल्कि घरेलू नीति और जनता के हित में भी एकदम सटीक है।



