
Is Janmashtami Cake Cutting right : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Shri Krishna Janmashtami) पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त 2025 को रात 11:49 बजे आरंभ होकर 16 अगस्त की रात 9:34 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, मुख्य जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जा रही है। इस बार गृहस्थ और संन्यासी, दोनों ही शनिवार को जन्मोत्सव मना रहे हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्त ठाकुर जी का सोलह श्रृंगार (Krishna Shringar) करते हैं, सुंदर वस्त्र, आभूषण और फूल अर्पित करते हैं तथा भोग (Krishna Bhog) और विशेष पूजन करते हैं।
आजकल बदलते समय के साथ कई लोग इस अवसर पर केक काटकर (Janmashtami Cake Cutting) भी श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाने लगे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह परंपरा धार्मिक दृष्टि से उचित है? इसी विषय पर वृंदावन धाम के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) ने अपना स्पष्ट मत दिया है।
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जन्माष्टमी पर केक काटना उचित है या नहीं? (Is Janmashtami Cake Cutting Right on Janmashtami)
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो में एक भक्त ने प्रेमानंद जी महाराज से यही सवाल पूछा कि क्या जन्माष्टमी पर केक काटकर भगवान का जन्मदिन मनाना सही है (Janmashtami Cake Cutting)?
महाराज जी ने कहा कि सामान्यतः बाजार में मिलने वाले ज्यादातर केक अंडा-युक्त या अंडा-रहित दोनों प्रकार के होते हैं। लेकिन बेकरी की शुद्धता पर संदेह बना रहता है। ऐसे में पूजा या भोग के लिए इसका उपयोग करना उचित नहीं है।
सात्विक भोग का महत्व (Satvik Bhog Importance on Janmashtami)
प्रेमानंद महाराज के अनुसार जन्माष्टमी पर भगवान को वही भोग अर्पित करना चाहिए, जो सात्विक हो और घर पर शुद्ध भाव से तैयार किया गया हो।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘यदि कोई श्रद्धा से एक रोटी पर घी लगाकर भी ठाकुर जी को भोग लगा दे, तो भगवान प्रसन्न हो जाते हैं।’
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इस दिन पंचामृत, माखन-मिश्री, पूरी, हलवा, लड्डू और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाकर अर्पित करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
जन्माष्टमी पर केक काटना (Janmashtami Cake Cutting) आधुनिकता की झलक हो सकती है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह उचित नहीं माना गया है। प्रेमानंद जी महाराज का स्पष्ट मत है कि भगवान को वही अर्पित करें, जो धर्मशास्त्रों के अनुसार सात्विक और शुद्ध हो।
इसलिए इस जन्माष्टमी (Janmashtami 2025 Celebration) पर परंपरागत तरीके से ही श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं और उन्हें घर पर बने सात्विक भोग से प्रसन्न करें।



