
Mauni Amavasya 2026 : सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, तर्पण और मौन व्रत का विशेष महत्व होता है। पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार मौनी अमावस्या पर 25 घंटे 18 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा, जबकि अमृत स्नान के लिए 8 घंटे 30 मिनट का विशेष समय प्राप्त होगा।
मौनी अमावस्या 2026 की तिथि और समय (Mauni Amavasya 2026 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 12:04 बजे से शुरू होकर 19 जनवरी की मध्यरात्रि 1:21 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 18 जनवरी 2026 को ही मौनी अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा।
हालांकि, 17 जनवरी की रात के बाद से ही स्नान और साधना का पुण्य प्रारंभ हो जाएगा। अगले दिन 19 जनवरी की सुबह दो घटी यानी 48 मिनट तक गंगा स्नान और ध्यान का विशेष मुहूर्त बताया गया है।
स्नान के शुभ मुहूर्त (Mauni Amavasya 2026 Snan Timing)
- 17 जनवरी रात 12:04 से सुबह 5:58 बजे तक – मध्यम मुहूर्त
- सुबह 5:59 से 11:55 बजे तक – उत्तम मुहूर्त
- दोपहर 11:56 से शाम 4:39 बजे तक – मध्यम मुहूर्त
- 19 जनवरी सुबह 5:58 से 7:28 बजे तक – उत्तम मुहूर्त
अमृत स्नान का विशेष योग
18 जनवरी को शाम 4:41 बजे से रात 1:22 बजे तक सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में युति बनाएंगे। इस दौरान 8.30 घंटे का अमृत स्नान योग रहेगा। साथ ही शाम 4:41 बजे से रात 9:23 बजे तक हर्षण योग बनेगा, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है।
इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, हर्षण योग और शिव वास योग भी पूरे दिन विद्यमान रहेंगे। पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग इस दिन को स्नान, दान और पूजा के लिए और भी विशेष बनाता है।
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मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) का धार्मिक महत्व
मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) का मुख्य महत्व मौन व्रत और पितृ तर्पण से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मौन धारण करने से मन, वाणी और विचारों की शुद्धि होती है। मौन व्यक्ति को आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक संतुलन की ओर ले जाता है।
चूंकि अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) तिथि पितरों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इस दिन किया गया तर्पण, दान और श्राद्ध कर्म पितरों को तृप्त करता है और पितृ दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है।
गंगा स्नान न कर सकें तो क्या करें?
यदि किसी कारणवश गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में कुछ बूंदें गंगाजल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है।
मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) पर दान और उपाय
इस दिन अन्न, वस्त्र, कंबल और जरूरतमंदों की वस्तुओं का दान करना विशेष फल देता है। साथ ही गौसेवा, पशु-पक्षियों को दाना-चारा डालना भी पुण्यदायी माना गया है।
संध्या समय घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाना पितरों की कृपा प्राप्त करने और घर में शांति व सुख-समृद्धि लाने वाला उपाय बताया गया है।
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