
दक्षिण-पूर्व एशिया की सीमाओं पर गोलियों की गूंज ने एक बार फिर इस शांति क्षेत्र को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है। थाईलैंड और कंबोडिया की सेनाएं (Thailand Cambodia Conflict) गुरुवार सुबह उस वक्त आमने-सामने आ गईं जब ता मुएन थॉम (Ta Muen Thom) और ता मोआन थॉम (Ta Moan Thom) मंदिरों के पास भीषण गोलीबारी और बमबारी शुरू हो गई। यह वही विवादित सीमावर्ती क्षेत्र है, जिसे दोनों देश अपनी-अपनी जमीन बताते हैं।
थाईलैंड के मुताबिक, यह झड़प उस समय शुरू हुई जब उनके सैनिकों ने एक संदिग्ध ड्रोन देखा और उसके बाद कंबोडियाई सैनिकों को सीमा के नजदीक भारी हथियारों के साथ आते हुए पाया। थाई सेना का दावा है कि कंबोडिया की ओर से पहले फायरिंग (Thailand Cambodia Conflict) की गई, जिसमें जवाबी कार्रवाई की गई।
वहीं कंबोडिया का कहना है कि उसने केवल अपने क्षेत्र की रक्षा की है और थाई सैनिकों ने सीमा का उल्लंघन किया।
Thailand Cambodia Conflict सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। थाईलैंड के सुरिन प्रांत में एक अस्पताल और नागरिक इलाकों पर हमले की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया।
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थाई सेना ने आरोप लगाया है कि कंबोडिया की तरफ से BM-21 रॉकेट दागे गए, जिनमें एक नागरिक की मौत हो गई और एक पांच साल का बच्चा भी घायल हुआ है। फैनोम डोंग राक अस्पताल (Phanom Dong Rak Hospital) पर हुए कथित हमले को लेकर थाई सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
इस हिंसा के बाद थाईलैंड ने कड़े कदम उठाए हैं। सभी उत्तर-पूर्वी सीमा चौकियों को बंद कर दिया गया है, नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है, और कंबोडिया के राजदूत को देश छोड़ने को कहा गया है। जवाब में, कंबोडिया ने भी थाई राजदूत को निष्कासित कर दिया और बैंकॉक स्थित अपने दूतावास को खाली करने का आदेश दिया।
Thailand Cambodia Conflict की वजह क्या है?
इस संघर्ष की जड़ें भूगोल और इतिहास दोनों में हैं। ता मुएन थॉम और ता मोआन थॉम जैसे मंदिर 11वीं-12वीं शताब्दी के खमेर युग की धरोहर हैं, जो आज कंबोडिया और थाईलैंड के बीच की सीमा पर बसे हैं। दोनों देश इन मंदिरों और उनके आसपास के इलाके को अपनी जमीन मानते हैं।
हालांकि 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने प्रेअ विहेयर मंदिर (Preah Vihear Temple) को कंबोडिया को सौंपा था, लेकिन सीमा रेखा स्पष्ट न होने के कारण यह विवाद कभी खत्म नहीं हो सका। खासकर पारंपरिक नक्शों और उपग्रह डेटा को लेकर दोनों देशों के बीच बार-बार विवाद होता रहा है।
इस बार विवाद (Thailand Cambodia Conflict) उस वक्त भड़क गया जब बुधवार को थाई सेना के पांच जवान लैंडमाइन (Landmine Explosion) में घायल हो गए। थाईलैंड का आरोप है कि ये लैंडमाइंस हाल ही में कंबोडिया द्वारा बिछाए गए थे और यह संवेदनशील और पहले से साफ की गई जमीन थी। दूसरी ओर, कंबोडिया ने कहा कि धमाका उसके इलाके में हुआ और वह पुरानी जंग की बची-खुची बारूद हो सकती है।
कंबोडिया का सैन्य रुख और थाईलैंड की सियासी हलचल
कंबोडिया ने इस संघर्ष को थाई आक्रामकता बताया और ऐलान किया कि अगर जरूरत पड़ी तो अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी ताक़त से लड़ेंगे। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत (Hun Manet) ने घोषणा की है कि देश में फिर से अनिवार्य सैन्य सेवा (Military Conscription) लागू की जाएगी ताकि आम नागरिकों को भी युद्ध के लिए तैयार किया जा सके।
वहीं, थाईलैंड में यह संकट राजनीतिक मोड़ ले चुका है। प्रधानमंत्री पाएटोंगटार्न शिनावात्रा (Paetongtarn Shinawatra) को हाल ही में एक आचरण जांच के चलते निलंबित कर दिया गया है, और विपक्षी दल इस झड़प को सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहे हैं। एक लीक कॉल, जिसमें वह पूर्व कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन सेन से बातचीत कर रही थीं, ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
क्या यह झड़प (Thailand Cambodia Conflict) युद्ध में बदल जाएगी?
संकेत स्पष्ट हैं, दोनों देश कूटनीतिक रास्तों को छोड़कर अब सैन्य समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। थाईलैंड के पास वायु शक्ति और तकनीक में बढ़त है, वहीं कंबोडिया की सेना जमीनी रणनीतियों में पारंगत है।
दोनों तरफ से F-16 लड़ाकू विमान, रॉकेट लॉन्चर, टैंक और भारी हथियार जुटाए जा रहे हैं। अगर जल्द कोई कूटनीतिक हल नहीं निकला तो यह लड़ाई एक पूर्ण सीमा युद्ध (Full-Scale Border War) का रूप ले सकती है, जिससे पूरे ASEAN क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ सकती है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि 1962 के ICJ फैसले से शुरू होती है, लेकिन वास्तविक टकराव 2008 के बाद तेज हुआ। 2008 से 2011 तक दोनों देशों के बीच प्रेअ विहेयर और आसपास के इलाकों को लेकर कई बार सैन्य झड़पें हो चुकी हैं। 2011 में फिर से ICJ ने फैसला दिया कि प्राचीन मंदिर कंबोडिया का हिस्सा है, लेकिन थाई राष्ट्रवादी समूह इस फैसले को आज तक नहीं मानते।


