

भारतीय राजनीति के एक नए विवाद के केंद्र में एक बार फिर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) आ खड़े हुए हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी द्वारा भारतीय सेना पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर सख्त रुख अपनाया और कहा कि एक सच्चा भारतीय ऐसा बयान नहीं देगा।
हालांकि अदालत ने फिलहाल राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के खिलाफ दर्ज मानहानि केस पर रोक लगा दी है, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और सोशल मीडिया पर नहीं, संसद के पटल पर अपनी बात रखें।
मामला दिसंबर 2022 में भारत और चीन के बीच हुई झड़प से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जवानों को पीट रही है और मीडिया इस पर कोई सवाल नहीं पूछ रहा।
राहुल (Rahul Gandhi) ने आरोप लगाया था कि ‘चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि पर कब्जा कर लिया है, 20 जवानों को मार डाला, और हमारे सैनिकों को पीट दिया, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं है कि वो इस पर सवाल पूछे।’
इस बयान को लेकर एक स्थानीय अधिवक्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि यह बयान भारतीय सेना का मनोबल गिराने वाला है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
राहुल गांधी ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि यह मुकदमा दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। लेकिन 29 मई को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीखे सवाल पूछे, ‘आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भूमि कब्जा की है? क्या आपने इसकी पुष्टि की है?’ अदालत ने यह भी कहा कि एक नेता प्रतिपक्ष का यह दायित्व है कि वह संसद में गंभीर मुद्दों को उठाए, न कि सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से बयानबाज़ी करे।
बीजेपी का राहुल (Rahul Gandhi) पर निशाना
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें एक बार फिर ‘चीन गुरु’ कहकर पुकारा। BJP के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की संप्रभुता पर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के लिए फटकार लगाई है।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का हालिया ‘डेड इकॉनमी’ वाला बयान भी एक राजनयिक आपदा (Diplomatic Disaster) है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तारीफ कर दी और रूस जैसे सहयोगी देश को संघर्षशील बताया।
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क्या है डेड इकॉनमी वाला विवाद?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस की अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनमी कहा था। ट्रंप चाहते हैं कि भारत पूरी तरह से रूस से तेल खरीदना बंद कर दे और रक्षा समेत दूसरे व्यापार भी न करे। उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ का ऐलान किया है।
इस बारे में जब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था कि ट्रंप सही कह रहे हैं। कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता शशि थरूर से जब राहुल की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ कहने से इनकार कर दिया था।
चुनाव आयोग के साथ भी विवाद (Rahul Gandhi and Election Commission)
राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग के खिलाफ भी हमलावर रहे हैं। उनका आरोप है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में गड़बड़ी की गई थी। हाल में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहा है और वह मर चुका है।
चुनाव आयोग (ECI) का कहना है कि राहुल गांधी को दो महीने पहले बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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आरोप दर आरोप, साबित कुछ नहीं
सीमा पर मौजूद स्थिति से लेकर बिहार में Special Intensive Revision यानी SIR पर सवाल उठाने तक, राहुल गांधी ने कई आरोप लगाए, लेकिन सबूत एक में भी नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने यह बहस एक बार फिर तेज कर दी है कि नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सार्वजनिक बयान देने से पहले कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। सेना, सीमा विवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जब कोई बड़ा नेता सवाल उठाता है, तो उसका असर सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर भी असर डाल सकता है।



