
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को अफगान तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया कि शनिवार रात सीमा पर हुई भीषण झड़पों में 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं (Taliban takes revenge on Pakistani army)।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में अफगान बलों के 9 जवान भी शहीद हुए, जबकि 16 घायल हुए हैं। यह झड़पें ड्यूरंड लाइन के कई इलाकों तक फैली थीं। अफगान रक्षा मंत्री मौलवी मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने कहा है कि अफगान बल पूरी तरह सतर्क हैं और अगर पाकिस्तान ने फिर से सीमा का उल्लंघन किया तो जवाब पहले से भी अधिक सख्त होगा (Taliban takes revenge on Pakistani army)।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि यह कार्रवाई शनिवार देर रात तक चली और तड़के तक समाप्त हुई। तालिबान सरकार का कहना है कि यह हमला पाकिस्तान की बार-बार की सीमापार हरकतों के जवाब में किया गया।
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अफगान बलों ने न केवल कई चौकियों पर गोलाबारी की बल्कि तीन पाकिस्तानी पोस्टों पर नियंत्रण भी हासिल किया (Taliban takes revenge on Pakistani army)। तालिबान प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अफगानिस्तान को अपनी भूमि और वायुसीमा की रक्षा का पूरा अधिकार है और किसी भी हमले को अनुत्तरित नहीं छोड़ा जाएगा।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सीमा पार से फायरिंग पहले अफगानिस्तान की ओर से शुरू हुई थी। इस्लामाबाद का कहना है कि तालिबान लड़ाकों ने शनिवार देर रात खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान से सटी कई चौकियों – अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दिर, चितरल और बरामचा पर हमला किया ताकि प्रतिबंधित संगठन टीटीपी (Tehrik-i-Taliban Pakistan) के सदस्यों को पाकिस्तान में घुसने का मौका मिल सके। पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई में कई अफगान पोस्टों को नष्ट करने का दावा किया है।
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इन हमलों को बेवजह और उकसावे भरा बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना हर ईंट का जवाब पत्थर से दे रही है और किसी भी उकसावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नकवी ने यह भी आरोप लगाया कि अफगान सेना ने सीमा पार से नागरिक इलाकों पर फायरिंग की, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। इन झड़पों के बाद पाकिस्तान ने अपनी मुख्य सीमा चौकियों – टोरखम और चमन को तत्काल बंद कर दिया है। साथ ही खरलाची, अंगूर अड्डा और गुलाम खान जैसे छोटे मार्गों को भी सील कर दिया गया है।
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टीटीपी की वजह से तनाव
तनाव का यह दौर (Taliban takes revenge on Pakistani army) ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत की यात्रा पर हैं। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से काबुल से किसी वरिष्ठ अफगान नेता की पहली राजनयिक यात्रा मानी जा रही है।
इस बीच दोनों देशों के बीच बढ़ती खींचतान (Taliban takes revenge on Pakistani army) का सबसे बड़ा कारण वही पुराना है, टीटीपी का मुद्दा। पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पाकिस्तानी तालिबान के लड़ाकों को शरण दे रहा है, जबकि काबुल सरकार का कहना है कि पाकिस्तान खुद अपने भीतर के आतंकी नेटवर्क को नियंत्रित नहीं कर पा रहा।
अफगान-पाक सीमा पर हुई यह झड़प सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि एक गहरी कूटनीतिक दरार का संकेत भी है। ड्यूरंड लाइन की यह पुरानी खींचतान, जो कभी औपनिवेशिक नक्शों में बनी थी, आज भी दोनों देशों के बीच अविश्वास की सबसे बड़ी दीवार बनी हुई है।
अफगानिस्तान इसे अपने संप्रभु अधिकार का मामला बताता है, जबकि पाकिस्तान इसे आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा की जरूरत कहता है। फिलहाल स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और दोनों देशों की सेनाएं सीमा पर अलर्ट पर हैं।
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