Threat on PM Narendra Modi : लोकसभा में बजट सत्र के सातवें दिन बुधवार (05 फरवरी) को एक असाधारण स्थिति देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। यह घटना करीब 22 साल बाद सामने आई है। इससे पहले ऐसा 2004 में हुआ था।
इस बीच न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री पर शारीरिक हमले की साजिश की आशंका के चलते पीएम मोदी ने लोकसभा को संबोधित न करने का निर्णय लिया (Threat on PM Narendra Modi)।
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संसद में मौजूद थे पीएम मोदी, भाषण के लिए थे तैयार
रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मौजूद थे और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए पूरी तरह तैयार थे। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर यह आशंका जताई गई कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के खिलाफ अप्रत्याशित और हिंसक कदम उठा सकते हैं (Threat on PM Narendra Modi)।
सूत्रों का दावा है कि इसी रणनीति के तहत विपक्ष ने कुछ महिला सांसदों को ट्रेजरी बेंच के पास भेजा, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। हालात को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ने सदन को स्थगित करने का फैसला किया।
स्पीकर ओम बिरला ने किया खुलासा
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस बारे में बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि जब प्रधानमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने वाले थे, तब उन्हें ठोस सूचना मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सदस्य अप्रत्याशित कदम उठा सकते हैं (Threat on PM Narendra Modi)। इसी वजह से स्थिति को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी।
उन्होंने अंत में सभी सांसदों से संयम बरतने और संसदीय मर्यादाओं का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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2004 के बाद फिर दोहराया गया संसदीय इतिहास
लगातार हो रहे हंगामे और नारेबाजी के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को ध्वनिमत की प्रक्रिया शुरू कराई। इसके बाद प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
इस तरह 22 साल बाद लोकसभा में ऐसा हुआ है जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना पारित किया गया। इससे पहले 2004 में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब भाजपा के विरोध के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाब नहीं दे पाए थे।



