

बारिश में ठंडी हवा चलती है तो गांव, कस्बों में झूले झूलते दिखाई देते हैं, मेंहदी की खुशबू गलियों में घुल जाती है और चौखट पर गीत गूंजते हैं। यही तो है तीज (Teej Festival) का मौसम। लेकिन तीज बस हरतालिका (Hartalika Teej) नहीं होती। uplive24.com पर जानिए सभी तीज और उनके महत्व के बारे में।
भारत का त्योहारों से भरा कैलेंडर सिर्फ ऋतुओं और फसलों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह स्त्री-शक्ति, प्रेम और भक्ति की परंपरा का भी प्रतीक है। इन्हीं में से एक श्रृंखला है तीज (Teej Festival), जो मुख्य रूप से उत्तर भारत और खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाई जाती है।
तीज (Teej) का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव की कथा से है। माना जाता है कि पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया। इसलिए तीज के दिन महिलाएं उपवास रखकर अपनी वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
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लेकिन क्या आप जानते हैं कि सालभर में कई तरह की तीजें मनाई जाती हैं (Types of Teej Festival in India)? आइए, एक-एक कर सभी तीजों का महत्व, पूजन विधि और पौराणिक कथा को समझते हैं।
हरियाली तीज (Hariyali Teej)
सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज (Hariyali Teej) आती है। यह तीज सावन की हरियाली और उमंग का प्रतीक है। इसे नवविवाहित महिलाएं विशेष रूप से मनाती हैं, क्योंकि इसे शिव-पार्वती के मिलन का दिन माना गया है।
पूजन विधि : इस दिन महिलाएं हरे वस्त्र पहनती हैं, चूड़ियां और मेहंदी सजाती हैं। माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और झूला झूलने की परंपरा निभाती हैं। कथा सुनने और पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है।
कजरी तीज (Kajari Teej / Kajali Teej)
भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज आती है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
राजस्थान के बूंदी शहर में तो इस दिन माता पार्वती की भव्य शोभायात्रा निकलती है। महिलाएं कजरी गीत गाती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। कई जगह नीम की पूजा करने की परंपरा भी है।
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हरतालिका तीज (Hartalika Teej)
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज आती है। यह सबसे कठिन और महत्वपूर्ण तीज (Hartalika Teej) मानी जाती है। इसका नाम ‘हरतालिका’ इसलिए पड़ा क्योंकि देवी पार्वती की सहेलियों ने उन्हें हर यानी उठा लिया और जंगल में ले जाकर कठोर तपस्या करने को प्रेरित किया था।
इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी भोजन और पानी दोनों का त्याग करती हैं। वे मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजन करती हैं, 16 श्रृंगार करती हैं और पूरी रात जागरण व भजन-कीर्तन करती हैं।
आखा तीज / अक्षय तृतीया (Akha Teej / Akshaya Tritiya)
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी पुण्य कार्य कभी क्षय नहीं होता।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था। लोग इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और नए कामों की शुरुआत करते हैं। सोना खरीदने की परंपरा भी इसी दिन से जुड़ी है।
पूजन-विधि : विष्णु-लक्ष्मी की पूजा, गऊ–सेवा, जल-दान, अन्न दान, और वंश परंपरा के पितृ तर्पण का भी विधान है।
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गणगौर तीज (Gangaur Teej)
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर पर्व मनाया जाता है। यह खासतौर पर राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में लोकप्रिय है। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ है पार्वती।
यह त्योहार सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे पति की प्राप्ति की कामना करती हैं।
अनुष्ठान व रस्में : सुहागिनें मेहंदी, गहने, गौर माता की प्रतिमाएं सजाती-पटाती हैं, जल–कलश और गीतों के साथ शोभायात्राएं निकलती हैं। कुएं/तालाब की परिक्रमा की जाती है।
रंभा तीज (Rambha Teej)
रंभा तीज ज्येष्ठ मास में आती है। इसे रंभा देवी और माता पार्वती की पूजा का पर्व माना जाता है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और कथा सुनकर जल ग्रहण करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से पति की उम्र लंबी होती है और दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।
व्रत-विधि (Rambha Teej Vrat) : कई क्षेत्रों में निर्जला व्रत, शाम का पूजन, रात्रि कथा-श्रवण के बाद जल–ग्रहण।
वराह तीज (Varaha Teej)
वराह तीज भगवान विष्णु के वराह अवतार से जुड़ी है। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने वराह रूप में धरती माता (भूदेवी) को हिरण्याक्ष राक्षस से बचाया था।
खास बात यह है कि यह व्रत केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी कर सकते हैं।
पूजन-विधि (Varaha Teej Puja) : विष्णु-भूदेवी का पूजन करते हैं। शंख, तुलसी और पीत वस्त्रों का अर्पण करना चाहिए। दान, धर्म और पर्यावरण संरक्षण (भूदेवी कृतज्ञता) का संकल्प लें।
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तीज का महत्व (Teej Significance)
- आध्यात्मिक अनुशासन : व्रत–पूजन से मन संयमित होता है।
- दांपत्य-सौहार्द : शिव-पार्वती आदर्श से वैवाहिक जीवन में स्थिरता की प्रेरणा।
- सामुदायिक बंधन : समूह-गीत, झूले, शोभायात्राएं समाज को जोड़ते हैं।
- प्रकृति का आभार : जिसने जीवन दिया और जो पाल रहा है, उसके प्रति कृतज्ञता।
- ऋतु समन्वय : सावन भादो की नमी, शरीर मन के अनुकूल आहार विहार।
- परंपरा संस्कृति : लोकगीत, लोक-वस्त्र, लोक व्यंजन और परंपराएं हमारी धरोहर हैं।
तीज पूजा सामाग्री (Teej Puja Samagri)
गौरी-शंकर प्रतिमा/चित्र, मिट्टी/मृत्तिका (Hartalika के लिए), रोली, हल्दी, कुंकुम, बिल्वपत्र/पुष्प, धूप दीप, नैवेद्य (फलों/स्वादिष्ट पकवान), सुहाग-सामग्री (चूड़ी, बिंदी, सिंदूर), कलश, स्वच्छ वस्त्र, अर्घ्य के लिए करछुल/कलश (Kajari के लिए)।
जो महिलाएं गर्भवती हैं या अपने बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन्हें तीज व्रत करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह बुजुर्ग महिलाओं, डायबिटीज/ब्लड-प्रेशर/किडनी रोगियों को भी चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए (Teej Fasting Safety)।
Teej FAQs
Q. सालभर में कितनी तीज मनाई जाती हैं?
उत्तरी भारत में प्रचलित प्रमुख तीज – हरियाली, कजरी, हरतालिका – तीन मानी जाती हैं; परंपरा में अक्षय तृतीया, गणगौर, रंभा तीज, वराह तीज भी तृतीया-तिथि के विशेष पर्व हैं और कई समुदाय इन्हें समान श्रद्धा से मनाते हैं। (Types of Teej in India)
Q. हरतालिका तीज क्या निर्जला होती है?
बहुत जगह हां, पर यह नियम नहीं, संकल्प है। स्वास्थ्य-सम्बंधी स्थिति में फलाहार/जल के साथ व्रत भी मान्य है। बस भाव पवित्र होना चाहिए। (Hartalika Teej Nirjala)
Q. कजरी तीज में चांद को अर्घ्य क्यों?
भादो के कृष्ण पक्ष में घटती चांदनी मन के विक्षेपों को दर्शाती है; अर्घ्य चंद्र-शीतलता का आह्वान है। (Kajari Teej Moon Arghya)



