Vaishakh Amavasya : हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब यह तिथि वैशाख मास में आती है तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। इसे वैशाख अमावस्या कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन स्नान, दान, तर्पण और पितृ पूजा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
कहा जाता है कि वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) पर पवित्र नदी में स्नान करने से अनजाने में किए गए पापों का क्षय होता है। वहीं जरूरतमंदों को दान देने और पितरों के नाम तर्पण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) कब है?
पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को रात 8 बजकर 12 मिनट से होगी। यह तिथि 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को शाम 5 बजकर 22 मिनट तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान, दान, तर्पण और पूजा-पाठ करना श्रेष्ठ माना जाएगा। सुबह का समय इन कार्यों के लिए सबसे शुभ रहेगा।
वैशाख अमावस्या तिथि समय
- अमावस्या तिथि आरंभ : 16 अप्रैल 2026, रात 8:12 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त : 17 अप्रैल 2026, शाम 5:22 बजे
- वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) व्रत और स्नान-दान : 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार
वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) शुभ मुहूर्त
धार्मिक कार्य शुभ मुहूर्त में किए जाएं तो उनका फल अधिक मिलता है। इसलिए वैशाख अमावस्या पर यह समय विशेष माना गया है।
- सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 53 मिनट
- लाभ चौघड़िया : सुबह 7:30 बजे से 9:07 बजे तक
- अमृत चौघड़िया : सुबह 9:07 बजे से 10:43 बजे तक
वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) पर पितरों को प्रसन्न करने के उपाय
स्नान के बाद करें तिल और छाते का दान : अमावस्या के दिन सुबह स्नान के बाद किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को काले तिल और छाते का दान करें। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति आती है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं : वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) के दिन तर्पण करने के बाद पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे पितृ दोष दूर होने की मान्यता है और परिवार में खुशहाली आती है।
गंगाजल मिलाकर करें स्नान : अगर पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर के स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद पितरों के लिए जल अर्पित करें।
पितृ मंत्र का जाप करें : तर्पण करते समय इस मंत्र का जाप करें – ॐ सर्व पितृ देवाय नमः। इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करने पर पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भगवान विष्णु की पूजा करें : अमावस्या (Vaishakh Amavasya) के दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति आती है।
शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं : शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मान्यता है कि इससे पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर कृपा बनाए रखते हैं।
वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) का धार्मिक महत्व
वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya) केवल व्रत या पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, दान और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है। इस दिन किए गए पुण्य कार्यों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि मन को भी शांति मिलती है।
अगर आप जीवन में बाधाओं, पितृ दोष या मानसिक तनाव से परेशान हैं, तो श्रद्धा और नियमपूर्वक वैशाख अमावस्या के उपाय करना लाभकारी माना जाता है।



