
valentines day Love Marriage Astrology : जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती हैं! जिससे संयोग होगा, उससे रिश्ता जुड़ ही जाएगा!
बचपन से हम यह सुनते आए हैं, लेकिन क्या सच में शादी पहले से तय होती है? क्या कुंडली देखकर यह जाना जा सकता है कि आपकी शादी लव मैरिज होगी या अरेंज मैरिज? और अगर प्रेम होगा, तो कैसा होगा – सच्चा, निस्वार्थ या सिर्फ आकर्षण?
ज्योतिष शास्त्र दावा करता है कि इन सवालों के जवाब जाने जा सकते हैं। बशर्ते ज्योतिष विद्या का गहरा जानकार आपकी कुंडली जानता हो। प्यार मोहब्बत जैसे मामलों पर से भी पर्दा उठा सकता है ज्योतिष शास्त्र (valentines day Love Marriage Astrology)।
किसी की कुंडली के जरिए उसके वर्तमान ही नहीं, बल्कि भूत और भविष्य के बारे में भी जाना जा सकता है। सिर्फ उस व्यक्ति के जन्म स्थान, जन्म तिथि और जन्म के समय का पता होना चाहिए। यह जानकारी जितनी सटीक होगी, उतनी ही सटीक होगी भविष्यवाणी भी।
धार्मिक अभिरुचि वाले मानते हैं कि उनकी जिंदगी में जो कुछ हो रहा है या होने वाला है, वह सब कुछ पहले से तय है। इसे ही विधि का विधान कहते हैं और इसे किसी भी तरीके से टाला नहीं जा सकता। यही बात प्रेम पर भी लागू होती है। जिंदगी में किसी के साथ प्रेम होना है, तो ज्योतिष के अनुसार वह भी पहले से निर्धारित है।
कुंडली में ग्रहों की दशा सिर्फ राशिफल ही नहीं बताती, जीवन का हर पहलू बता देती है। ग्रहों की दशा बताती है कि नसीब में प्यार है या नहीं। यूं तो सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहू और केतु नवग्रह हैं, लेकिन प्रेम और प्रेम विवाह का जिम्मा चंद्र, मंगल और शुक्र के ही पास है (valentines day Love Marriage Astrology)।
- शुक्र प्रेम, आकर्षण और दांपत्य सुख का कारक माना जाता है।
- चंद्र भावनाओं और पहली नजर के प्यार का प्रतीक है।
- मंगल साहस और निर्णय लेने की शक्ति देता है, जो प्रेम विवाह में जरूरी होती है।
पुरुष कुंडली में यौन जीवन का कारक शुक्र को माना जाता है, जबकि स्त्री की जन्म कुंडली में मंगल को। शुक्र प्रेम का कारक ग्रह है, वहीं, चंद्र पहली नजर में प्यार और रसिकता का कारक ग्रह है। मंगल साहस, हिम्मत, विजय के लिए कारक ग्रह है। अगर शुक्र, चंद्रमा और मंगल आपकी कुंडली में सही स्थिति में हैं, तो समझिए कि आपके जीवन में प्रेम तय है (valentines day Love Marriage Astrology)।
कैसा होगा प्रेम, यह भी जानकारी
ज्योतिषीय आधार पर न सिर्फ इस बात का पता चलता है कि किसी व्यक्ति का प्रेम विवाह होगा या नहीं, बल्कि यह जानकारी भी हो सकती है कि प्रेम कैसा होगा। निश्छल होगा या स्वार्थपूर्ण। शुक्र का शुभ ग्रहों के साथ योग और जन्म कुंडली के पहले भाव, पंचम भाव और नवम भाव पर गुरु का प्रभाव हो, लग्न भाव में शुभ राशि और शुभ ग्रहों का प्रभाव हो और मंगल व पंचम भाव बलवान हो, तो जातक चरित्रवान और आदर्श प्रेमी होता है। उस व्यक्ति का प्रेम उच्च कोटि का होता है।
यदि कुंडली में शुक्र का संबंध पाप ग्रह यानी शनि, मंगल, राहु, केतु से होता है, तो व्यभिचार का योग बनता है। इसका मतलब कि प्रेम वासनामय होता है। शुक्र और चंद्र की युति से संबंध में जो प्रेम बनता है, उसमें हमेशा आकर्षण बना रहता है (valentines day Love Marriage Astrology)।
यदि जन्म कुंडली में बृहस्पति का संबंध शुक्र से बन रहा है या शुक्र और गुरु एक साथ बैठे हों, दोनों ग्रह नवम, पंचम दृष्टि संबंध बना रहे हों, तो ऐसे जातक का निश्चित ही प्रेम विवाह होता है। ऐसे विवाह को ही सात जन्मों वाला कहते हैं।
क्या प्रेम विवाह की सफलता की गारंटी लेते हैं ग्रह?
अगर कुंडली में प्रेम का योग नहीं, लेकिन लालसा है, तो कुछ उपाय किए जा सकते हैं। प्रेम विवाह न होने या उसके असफल होने के पीछे चार ग्रहों की कमजोर स्थिति कारण बनती है। ये चार ग्रह हैं- शुक्र, गुरु, बुध और राहु।
शुक्र के कमजोर होने से आकर्षण घटने लगता है। सौंदर्य के प्रति उसकी दिलचस्पी नहीं रह जाती। गुरु यदि कमजोर है, तो व्यक्ति में भोग की लालसा नहीं रह जाती। ऐसे में प्रेम संबंध में रोमांच खत्म हो जाता है। बुध कमजोर हो जाए, तो प्रेम का स्वभाव नहीं रह जाता। विवाह में फरेब मिलने की आशंका बढ़ जाती है (valentines day Love Marriage Astrology)।
वहीं, राहु निर्बल पड़े तो वैवाहिक जीवन में कल्पना और भ्रम की स्थितियां बनने लगती हैं। शक करने से झगड़े का जन्म होता है, जो कहीं से भी उचित नहीं। ऐसा प्यार टिकता नहीं। इसी के साथ कुंडली में पंचम और सप्तम भाव के कमजोर होने पर भी लव मैरिज के असफल होने का खतरा होता है। कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों को प्रेम में धोखा मिलने की ज्यादा आशंका होती है।
इन हालात से निजात पाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं।
- तीन माह तक हर गुरुवार को बृहस्पति भगवान या शिव मंदिर में पीला वस्तु, चने की दाल, पीले रंग का दूध का पेड़ा, गुण प्रसाद में चढ़ाएं।
- मंदिर जाते समय हमेशा पीला वस्त्र धारण करें।
- प्रत्येक गुरुवार को केले की जड़ का पूजन करें। व्रत रहने का प्रयास करें और बृहस्पति भगवान की कथा सुनें और सुनाएं।
- किसी अच्छे ज्योतिष की सलाह से पन्ना या पुखराज धारण करें।
- रोजाना सुबह सूर्य को जल चढ़ाएं (valentines day Love Marriage Astrology)।
- शुक्रवार को छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।
- रोज सुबह गायत्री मंत्र का जप करें।
- बृहस्पतिवार और पूर्णिमा का व्रत रखें।
- ज्योतिर्विद से पूछकर शुक्र, गुरु, बुध, राहु ग्रह की शांति के उपाय करें।
- कुंडली में पंचम भाव और पंचमेश तथा सप्तम भाव और सप्तमेश को मजबूत करें।
- अगर शुक्र, चंद्र, सप्तमेश या लग्नेश को राहु पीड़ित कर रहा है, तो राहु की शांति का उपाय करें। बुधवार को सिलोनी गोमेध चांदी में जड़ाकर ब्राह्मण से शोधन कराएं और बुधवार को ही धारण करें (valentines day Love Marriage Astrology)।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, जिस तरह प्रेम होने के लिए ग्रहों की दशा जिम्मेदार होती है, उसी तरह प्रेम में असफलता या बेवफाई के लिए भी कुछ स्थितियां कारण बनती हैं।
- यदि कुंडली में सप्तमेश पीड़ित हो तो ऐसे जातक प्रेम तो करते हैं, लेकिन विवाह करने में असफल सिद्ध होते हैं। कठिन प्रयासों के बाद भी ऐसे प्रेमियों को प्रेम विवाह में सफलता नहीं मिल पाती।
- यदि कुंडली में पंचमेश और सप्तमेश, दोनों षष्ठ, अष्टम या द्वादश भावों में स्थित हों, तो ऐसे जातक को प्रेम संबंधों में कुछ सीमा तक सफलता मिलती है, लेकिन वह पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाता।
- किसी कुंडली में पंचमेश, सप्तमेश दोनों पीड़ित हों और अपने भावों को न देखें तो ऐसे व्यक्ति को प्रेम में धोखा और असफलता मिलती है।
- यदि जातक की कुंडली में शुक्र सप्तमेश होकर पीड़ित हो तो ऐसे जातक को अपने प्रेम संबंधों में सफलता नहीं मिलती। ऐसे जातक का प्रेम एकतरफा होता है (valentines day Love Marriage Astrology)।
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प्रेम योग बनते कैसे हैं?
- कुंडली में सप्तमेश पर राहु या शनि की दृष्टि हो तो दो विवाह के योग बनते हैं। ऐसी स्थिति में आदमी प्रेम के लिए भटकता रहता है। प्रेम विवाह होने की स्थिति में काफी विरोध झेलना पड़ता है।
- कुंडली में जब पंचम स्थान पर राहु और केतु दोनों हो, तब प्रेम विवाह संभव है। हालांकि इसमें भी अड़चन आने की संभावना रहती है।
- शुक्र या गुरु लग्न से पंचम या नवम हों तो इस स्थिति में प्रेम विवाह निश्चित है। यह प्रेम निस्वार्थ होता है।
- गुरु शुक्र का योग हो या ये एक-दूसरे की राशि में बैठे हों। इन दोनों का पंचम नवम दृष्टि योग होने से प्रेम विवाह का योग बनता है।
- सप्तमेश के साथ या सप्तम भाव में राहु बैठने से या शुक्र के साथ राहु बैठने से भी प्रेम विवाह होता है। ऐसे लोग समाज के विपरीत जाकर या भागकर विवाह करते हैं। हालांकि इस तरह के व्यक्ति के व्यभिचारी होने की आशंका भी रहती है (valentines day Love Marriage Astrology)।
- मंगल यदि सप्तम भाव या उसके स्वामी से संबंधित होता है तो जातक के दो-तीन बार प्रेम की संभावना होती है। ऐसे व्यक्तियों के दो-तीन संबंध भी हो सकते हैं।
- शुक्र को शनि या राहु पूर्ण दृष्टि से देखते हों या शुक्र के साथ शनि या राहु बैठे हों तो जातक के प्रेम विवाह के अवसर बनते हैं।
- शुक्र यदि प्रथम भाव (लग्न) से या लग्न के स्वामी से या सप्तम या उसके स्वामी से संबंध बनाता है तो प्रेम विवाह होता है।
- चंद्र का लग्न भाव से संबंध हो या उसके स्वामी का सप्तम भाव से, तो प्रेम विवाह होने की संभावना रहती है।
- पंचम भाव के स्वामी का संबंध सप्तम भाव से हो या सप्तम भाव के स्वामी का संबंध पंचम भाव से हो तो प्रेम विवाह के शुद्ध योग बनते हैं।
- पंचम भाव में शुक्र और चंद्र की युति (साथ में) और पंचमेश का शुक्र और चंद्र से संबंध प्रेम विवाह योग बनाता है (valentines day Love Marriage Astrology)।
- पंचम भाव, सप्तम भाव और एकादश भाव के स्वामियों में परस्पर संबंध हो, तो भी प्रेम विवाह का योग बनता है।
- पंचमेश और सप्तमेश एक साथ बैठे हों और पंचमेश और सप्तमेश की दृष्टि एक-दूसरे पर हो तो प्रेम विवाह का स्पष्ट योग बनता है।
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