Vasudeva Chaturthi : चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, जिसे वासुदेव चतुर्थी या विघ्नेश्वर चतुर्थी कहा जाता है, भगवान भगवान गणेश की विशेष पूजा का दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत-पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। यह पावन व्रत 22 मार्च, रविवार को मनाया जाएगा।
वासुदेव चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Vasudeva Chaturthi Shubh Muhurat)
चतुर्थी तिथि 21 मार्च की रात 11:56 बजे से शुरू होकर 22 मार्च की रात 9:16 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 22 मार्च को रखा जाएगा।
- ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:48 से 5:36 बजे तक
- चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त : 11:15 से 1:41 बजे तक
- विजय मुहूर्त : 2:30 से 3:19 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त : 6:32 से 6:56 बजे तक
- निशिता मुहूर्त : रात 12:04 से 12:51 बजे तक
इस दिन (Vasudeva Chaturthi) चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। सुबह 8:15 बजे से रात 10:15 बजे तक चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन चांद देखने से व्यक्ति पर झूठा आरोप (कलंक) लगता है, जैसा कि श्री कृष्ण पर स्यमंतक मणि चोरी का लगा था। भगवान गणेश ने चंद्रमा को शाप दिया था कि जो भी इस दिन उन्हें देखेगा, वह बदनाम होगा।
इस बार वासुदेव चतुर्थी (Vasudeva Chaturthi) पर दो विशेष योग बन रहे हैं – रवि योग और भद्रावास योग।
रवि योग रात 10:42 बजे तक रहेगा भद्रावास योग सुबह 10:36 से रात 9:16 बजे तक प्रभावी रहेगा
इन योगों में भगवान गणपति की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है।
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वासुदेव चतुर्थी पूजा विधि (Vasudeva Chaturthi Puja Vidhi)
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें।
पूजा के दौरान इन चीजों का विशेष ध्यान रखें – गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर, लाल फूल और जनेऊ अर्पित करें, सुपारी और अक्षत चढ़ाएं, दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
भोग के रूप में आप मोदक, बेसन के लड्डू, केले, मौसमी फल और पूरन पोली अर्पित कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
वासुदेव चतुर्थी (Vasudeva Chaturthi) के दिन न करें ये गलतियां
इस पवित्र दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, वरना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता।
भगवान गणेश को तुलसी पत्र अर्पित न करें, काले रंग के कपड़े पहनने से बचें, चंद्र दर्शन न करें, वरना मिथ्या दोष लग सकता है। इसी तरह से किसी से झगड़ा, विवाद या अपमान न करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन (Vasudeva Chaturthi) संयम और शांत स्वभाव बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
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वासुदेव चतुर्थी (Vasudeva Chaturthi) का आध्यात्मिक महत्व
वासुदेव चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर है। जब भक्त पूरी श्रद्धा और नियम से भगवान विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करता है, तो उसके जीवन की रुकावटें दूर होने लगती हैं।
यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि सफलता केवल प्रयास से नहीं, बल्कि सही आस्था और धैर्य से भी मिलती है।
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