
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) आजकल पाकिस्तान पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। उन्होंने पाकिस्तान के साथ डील की है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के साथ मिलकर अमेरिका उसके विशाल तेल भंडार (Pakistan Oil Reserves) को विकसित करेगा।
ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि हो सकता है, एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल बेचे! यह बयान उन्होंने Truth Social पर साझा किया, जिसके बाद दुनिया भर में यह सवाल उठने लगे कि क्या वाकई पाकिस्तान के पास इतना तेल (Pakistan Oil Reserves) है?
जो वास्तविकता सामने आई है, वह ट्रंप के दावे से बिल्कुल अलग है। ऊर्जा विशेषज्ञों, भौगोलिक सर्वेक्षणों और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों से साफ हो जाता है कि पाकिस्तान के पास वर्तमान में जो कच्चा तेल (Pakistan Oil Reserves) मौजूद है, वह महज दो साल की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ही पर्याप्त है। ऐसे में यह सोचना कि पाकिस्तान एक दिन तेल बेचेगा, कोरी कल्पना ज्यादा है।
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कितना है पाकिस्तान के पास तेल? (How much oil does Pakistan really have?)
US Energy Information Administration (EIA) और Worldometer के अनुसार, पाकिस्तान के पास 2016 तक मात्र 353.5 मिलियन बैरल तेल का भंडार (Pakistan Oil Reserves) है। यह वैश्विक तेल भंडार का केवल 0.021% हिस्सा है।
पाकिस्तान प्रतिदिन लगभग 5.56 लाख बैरल तेल का उपभोग करता है। इस हिसाब से, बिना नए तेल भंडार की खोज के, उसके मौजूदा भंडार 2 साल से भी कम चल पाएंगे। इसके विपरीत, भारत के पास 651.8 मिलियन मीट्रिक टन recoverable crude oil और 1,138.6 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का भंडार है, जो क्रमशः 20 और 30 साल की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
पाकिस्तान के पास नहीं है रणनीतिक तेल भंडार (No Strategic Oil Reserve in Pakistan)
भारत की तरह पाकिस्तान के पास कोई स्ट्रैटजिक ऑयल रिजर्व (Pakistan Oil Reserves) नहीं है। भारत में यह जिम्मेदारी Indian Strategic Petroleum Reserve Limited (ISPRL) के पास है, जो आपात स्थिति में देश को 74 दिनों तक तेल आपूर्ति सुनिश्चित कर सकता है।
पाकिस्तान न केवल रणनीतिक भंडार (Pakistan Oil Reserves) से वंचित है, बल्कि उसकी refining capacity भी अत्यंत सीमित है। देश में प्रतिदिन 4.5 लाख बैरल रिफाइनिंग की क्षमता है, लेकिन इसका वास्तविक उपयोग आधा भी नहीं होता।
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ट्रंप का दावा किस आधार पर?
ट्रंप का बयान शायद हाल ही में पाकिस्तान के Offshore Indus Basin में किए गए seismic surveys पर आधारित है। इन सर्वे में समुद्र के नीचे तेल और गैस के बड़े संरचनात्मक संकेत मिले हैं। कुछ रिपोर्ट्स ने तो इन्हें दुनिया के टॉप 4 रिजर्व में गिन लिया – वेनेजुएला, सऊदी अरब और ईरान के बाद।
लेकिन समस्या यह है कि इन आंकड़ों की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान में कथित तौर पर मौजूद इस तेल भंडार (Pakistan Oil Reserves) की पुष्टि के लिए कोई खुदाई सफल नहीं हुई है। 2019 में कराची तट के पास एक प्रयास शुरू किया गया था, लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली।
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पैसा है नहीं और सुरक्षा का पता नहीं
अगर मान भी लें कि पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में तेल (Pakistan Oil Reserves) है, तो उसे निकालने और प्रोसेस करने के लिए कम से कम 5 अरब डॉलर और 4-5 साल की आवश्यकता होगी। वहीं, pipeline, ports, refineries जैसी संरचनाएं बनाने के लिए और भी निवेश चाहिए।
इन सबके बीच पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता, 126 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज, और 17.5 अरब डॉलर का वार्षिक ऊर्जा आयात बिल पहले ही उसकी अर्थव्यवस्था पर बोझ डाल रहे हैं।
साथ ही, यदि अमेरिका पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र (Balochistan region) में तेल परियोजनाएं शुरू करता है, तो यह चीन के साथ पाकिस्तान के संबंधों में भी तनाव पैदा कर सकता है। क्योंकि चीन ने CPEC (China Pakistan Economic Corridor) के जरिए बलूचिस्तान में भारी निवेश कर रखा है, जहां पहले से ही सुरक्षा संकट और स्थानीय विरोध गहराया हुआ है।
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