
Who are Houthis : मध्य पूर्व इस समय जंग में घिरा हुआ है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान (America Israel and Iran war) पर जब हमला किया था, तब उन्हें भी नहीं पता था कि लड़ाई इतनी लंबी खिंच जाएगी। अब तो यह और उलझती जा रही है।
यमन के हूती (Who are Houthis) अब खुलकर ईरान के साथ खड़े हैं। उन्होंने भी दो दिन पहले इजरायल पर हमले किए। उनका यह कदम सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
सवाल सिर्फ मिसाइल और ड्रोन हमलों का नहीं है, बल्कि उस रणनीतिक स्थिति का है जहां से हूती पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकते हैं।
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हूतियों के कब्जे में Bab al-Mandab Strait है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है और यहीं से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है।
अगर हूती इस रास्ते को बंद करने की कोशिश करते हैं, और साथ ही ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बाधित करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। तेल की कीमतें बढ़ेंगी, शिपिंग महंगी होगी और पहले से कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
इतने ताकतवर कैसे हैं हूती?
मध्य पूर्व की राजनीति में हूती नाम बार-बार सुनाई पड़ता है। कभी यमन के एक स्थानीय विद्रोही समूह के रूप में उभरे ये लोग आज वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करने वाली ताकत बन चुके हैं। सवाल यह है कि आखिर हूती हैं कौन, कैसे इतने शक्तिशाली बने और क्यों पूरी दुनिया इन पर नजर रखे हुए है (Who are Houthis)?
हूती दरअसल यमन के जैदी शिया मुस्लिम समुदाय से जुड़े एक सशस्त्र और राजनीतिक समूह हैं। इनकी जड़ें 1990 के दशक के अंत में पड़ीं, लेकिन 2000 के आसपास इन्हें असली समर्थन मिलना शुरू हुआ। उस समय यमन में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कमजोर शासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ रहा था। इसी माहौल में हूती एक विरोध आंदोलन से धीरे-धीरे सैन्य ताकत में बदल गए (Who are Houthis)।
जब हूती ने राजधानी पर कब्जा किया
हूती आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ साल 2014 में आया, जब उन्होंने यमन की राजधानी सना (Sana’a) पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 2015 में उन्होंने पश्चिम समर्थित राष्ट्रपति अबद-रब्बू मंसूर हादी (Abd-Rabbu Mansour Hadi) की सरकार को हटा दिया। हादी को देश छोड़कर भागना पड़ा। यहीं से यमन में एक बड़े गृहयुद्ध की शुरुआत हुई (Who are Houthis)।
सऊदी अरब और यूएई की एंट्री
हादी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब और UAE ने सैन्य हस्तक्षेप किया। इस अभियान को पश्चिमी देशों का भी समर्थन मिला। दूसरी तरफ हूती लगातार मजबूत होते गए और उन्होंने देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कायम कर लिया।
इस युद्ध ने यमन को बुरी तरह झकझोर दिया। 2021 तक करीब 3.77 लाख लोगों की मौत हुई और लाखों लोग बेघर हो गए।
लगातार लड़ाई के बाद 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक युद्धविराम हुआ, जिसने हालात को कुछ हद तक स्थिर किया। हालांकि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
हूती (Who are Houthis) खुद को स्वतंत्र बताते हैं, लेकिन ईरान के साथ उनके करीबी संबंध माने जाते हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान उन्हें हथियार, प्रशिक्षण और फंडिंग देता है। हूती इसे सीधे तौर पर नहीं मानते, लेकिन राजनीतिक समर्थन स्वीकार करते हैं।
इसी वजह से हूती को अक्सर ईरान के Axis of Resistance का हिस्सा कहा जाता है, एक ऐसा नेटवर्क जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ खड़ा है।
हूती (Who are Houthis) की असली ताकत उनकी भौगोलिक स्थिति से आती है। यमन रेड सी (Red Sea) के पास स्थित है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्री व्यापार गुजरता है।
2023 में हमास द्वारा इजरायल पर हमले और उसके बाद गाजा युद्ध शुरू होने के बाद हूती ने रेड सी में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया। इससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई और कई देशों को अपने व्यापार मार्ग बदलने पड़े।
2025 में अमेरिका की मध्यस्थता से इजरायल और हमास के बीच संघर्षविराम हुआ, जिसके बाद हूती (Who are Houthis) ने अपने हमले रोक दिए थे, लेकिन अब वे फिर लड़ाई में कूद पड़े हैं, जिससे पूरी दुनिया में चिंता है।



