
बांग्लादेश में 2024 के जुलाई आंदोलन से उभरे प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी (Sharif Osman Hadi) की मौत ने एक बार फिर देश को राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के दौर में धकेल दिया है। ढाका में गोली लगने के बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत हो गई। उसकी मौत के बाद राजधानी ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन, तोड़फोड़ और राजनीतिक तनाव तेज हो गया है।
हादी (Sharif Osman Hadi) को जुलाई आंदोलन का एक प्रमुख लेकिन विवादास्पद चेहरा माना जाता था। वह न केवल शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय था, बल्कि उसकी राजनीति को लेकर कट्टर रुख और उग्र समर्थकों की भूमिका भी लगातार सवालों के घेरे में रही।
कौन था शरीफ उस्मान हादी?
Sharif Osman Hadi जुलाई 2024 में हुए उस जन-आंदोलन के नेताओं में शामिल था, जिसने अंततः Awami League सरकार और प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़ने पर मजबूर किया। वह Inqilab Mancha नाम के राजनीतिक मंच का प्रवक्ता था, जो छात्र आंदोलनों से निकला एक संगठन है और जिसने खुद को लोकतांत्रिक बदलाव की आवाज बताया।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि Inqilab Mancha और उससे जुड़े कई छात्र संगठन कट्टरपंथी राजनीति, दबाव की रणनीति और सड़क आधारित हिंसक आंदोलनों के सहारे आगे बढ़े। हादी (Sharif Osman Hadi) इसी राजनीति का एक सक्रिय चेहरा था और आगामी आम चुनावों में उम्मीदवार बनने की तैयारी कर रहा था।
कैसे हुआ हमला?
12 दिसंबर को हादी ढाका के पल्टन इलाके में चुनाव प्रचार कर रहा था। वह एक बैटरी-चलित रिक्शा में सवार था, तभी मोटरसाइकिल पर सवार एक हमलावर ने उसके सिर में गोली मार दी। गंभीर हालत में उसे पहले ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आपातकालीन ब्रेन सर्जरी की।
उसे 15 दिसंबर को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक गोली से ब्रेन स्टेम को गंभीर नुकसान पहुंचा था। छह दिन तक जीवन और मृत्यु से जूझने के बाद गुरुवार रात उसकी (Sharif Osman Hadi) मौत हो गई।
मौत के बाद क्यों भड़का बांग्लादेश?
हादी की मौत की खबर सामने आते ही ढाका के शाहबाग चौराहे समेत कई इलाकों में छात्र और समर्थक सड़कों पर उतर आए। नारेबाजी, प्रदर्शन और फिर धीरे-धीरे हिंसा की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर सुरक्षा में विफलता का आरोप लगाया और हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। हालात बिगड़ने पर कुछ जगहों पर मीडिया संस्थानों में तोड़फोड़, राजनीतिक नेताओं की संपत्तियों पर हमले और आगजनी की घटनाएं भी दर्ज की गईं।
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अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हादी (Sharif Osman Hadi) की मौत को देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया और शांति बनाए रखने की अपील की। सरकार ने जांच के आदेश दिए और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि बांग्लादेश में छात्र राजनीति और कट्टरपंथी समूहों को जिस तरह खुली छूट मिली, उसी का नतीजा है कि अब हालात सरकार के नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं।
Sharif Osman Hadi की हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश में उस अस्थिर लोकतांत्रिक संक्रमण को उजागर करती है, जो शेख हसीना सरकार के पतन के बाद शुरू हुआ।



