
Europe afraid of Chinese buses : यूरोप में इन दिनों एक अनोखी तरह की बेचैनी फैल गई है। यह बेचैनी किसी युद्ध, सीमा विवाद या अर्थव्यवस्था की वजह से नहीं, बल्कि सार्वजनिक बसों की वजह से है और इसका कारण है चीन। स्कैंडिनेविया के शांत और व्यवस्थित देशों, खासकर डेनमार्क और नॉर्वे, में अचानक यह डर उभर आया है कि कहीं चीनी तकनीक उनके पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बटन दबाकर रोक न दे।
यह चिंता केवल तकनीकी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भी है। मीडिया खबरों के मुताबिक, यूरोपीय देश अब गंभीरता से जांच कर रहे हैं कि कहीं चीन द्वारा बनाई गई बसें, खासकर Yutong की इलेक्ट्रिक बसें, किसी संकट की स्थिति में उनके खिलाफ इस्तेमाल न हो जाएं (Europe afraid of Chinese buses)।
चिंता का केंद्र है Yutong, जो चीन की एक दिग्गज बस निर्माता कंपनी है। यह कंपनी दुनिया में सबसे ज्यादा बसें बेचती है। स्कैंडिनेविया के कई शहरों की सड़कों पर आज सैकड़ों Yutong ई-बसे हैं। समस्या यह है कि इन बसों में ओवर-द-एयर अपडेट की सुविधा है यानी कंपनी दूर बैठकर इनके सिस्टम में बदलाव कर सकती है (Europe afraid of Chinese buses)।
यह भी पढ़ें : Nixon Mao Meeting : वह मुलाकात जिसने अमेरिका को चीन के करीब ला दिया
डेनमार्क की बस कंपनी Movia का कहना है कि अगर बस का सॉफ्टवेयर इंटरनेट से जुड़ा है तो इसे रिमोटली रोका भी जा सकता है। ये काम निर्माता भी कर सकता है और कोई हैकर भी। हालांकि कंपनी का कहना है कि यह समस्या सिर्फ चीनी नहीं, बल्कि हर उस वाहन के साथ है, जो इंटरनेट से जुड़ा है।
नॉर्वे में हुई टेस्टिंग ने बढ़ाया डर
इस विवाद (Europe afraid of Chinese buses) की शुरुआत नॉर्वे से हुई, जहां Ruter नाम की कंपनी ने बसों का सुरक्षा परीक्षण किया। एक पहाड़ी सुरंग में यह टेस्टिंग की गई, जहां नेटवर्क न हो।
परीक्षण में पाया गया कि डच कंपनी VDL की बसों में ऑटोमैटिक अपडेट की सुविधा नहीं थी, लेकिन Chinese Yutong बसों में सीधा डिजिटल एक्सेस था। यानी कंपनी चाहे तो बस को अपडेट कर सकती है, उसके सिस्टम को बदल सकती है और अगर चाहे तो उसे रोक भी सकती है।
इस पूरे विवाद पर Yutong ने अपनी सफाई में कहा कि वह यूरोपीय कानूनों का पालन करती है और डेटा पूरी तरह एन्क्रिप्टेड है, जिसका सर्वर जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में है।
यह भी पढ़ें : Taiwan : कार टकरा कर ताइवान को डराना चाहता था चीन
5G पर भी उठ चुका है संदेह
यूरोप में यह डर (Europe afraid of Chinese buses) नया नहीं है। इससे पहले Huawei और ZTE को 5G नेटवर्क से हटाया गया था। तब चिंता थी कि चीनी कंपनियां डेटा हैक कर सकती हैं।
अब वही संदेह इलेक्ट्रिक वाहनों पर आ गिरा है। डर है कि किसी संकट के समय चीन किसी भी यूरोपीय शहर के यातायात को ठप कर सकता है (Europe afraid of Chinese buses)।
हालांकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह जोखिम केवल चीन का नहीं, तकनीक का जोखिम है। Tesla जैसे ब्रांड्स में भी ऐसी क्षमताएं हैं।


