
अलास्का की ठंडी हवा में गर्माहट कुछ अलग थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Trump Putin meeting) आमने–सामने थे। जगह थी अलास्का का जॉइंट बेस एलमेंडॉर्फ–रिचर्डसन (Joint Base Elmendorf–Richardson), और माहौल बिल्कुल किसी फिल्मी सीन जैसा। लाल कालीन बिछा था, कैमरों की फ्लैश चमक रही थी और आसमान में अमेरिकी वायुसेना के B-2 स्टील्थ बॉम्बर और फाइटर जेट्स गरज रहे थे।
दोनों नेताओं (Trump Putin meeting) ने लंबा हाथ मिलाया, मुस्कुराए और फिर साथ-साथ उस गाड़ी में बैठे, जिसे पूरी दुनिया ‘The Beast’ के नाम से जानती है। इस दृश्य ने ही बता दिया कि यह मुलाकात सिर्फ बातचीत नहीं, बल्कि राजनीति और प्रतीकों का खेल भी है।
Trump Putin meeting लंबी, नतीजा अधूरा
करीब ढाई घंटे तक चली इस मुलाकात (Trump Putin meeting) में दोनों तरफ के बड़े अधिकारी मौजूद थे। हालांकि पहले तय किया गया कि ट्रंप और पुतिन अकेले मिलेंगे, लेकिन आखिरी वक्त में दोनों तरफ से तीन-तीन अफसर-नेता और शामिल हो गए।
बाहर इंतजार कर रहे पत्रकार किसी बड़े समझौते की घोषणा की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन जब दोनों नेता बाहर आए तो केवल चंद शब्द बोले और बिना सवाल लिए कैमरों के सामने से चले गए।
ट्रंप का कहना था कि बैठक (Trump Putin meeting) ‘बहुत ही प्रोडक्टिव’ रही और ‘कई बिंदुओं पर सहमति’ बनी, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ दिया – There’s no deal until there’s a deal – यानी फिलहाल हाथ खाली ही रहे। पुतिन ने भी इसे ‘understanding’ बताया, मगर ठोस कदम की कोई घोषणा नहीं हुई।
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पुतिन की वापसी (Putin Back on the Global Stage)
साल 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पुतिन पश्चिमी देशों की नजरों में अलग-थलग पड़ गए थे। कई देशों ने उनसे दूरी बना ली थी। लेकिन अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ लाल कालीन पर खड़े होकर स्वागत पाना (Trump Putin meeting) उनके लिए एक बड़ी जीत थी। रूस के चैनलों पर यही तस्वीरें दिखाई गईं – पुतिन और ट्रंप एक मंच पर, झंडों के बीच, और सैन्य विमानों की गड़गड़ाहट में।
दोस्ताना अंदाज या राजनीतिक चाल?
दोनों नेताओं की बातचीत (Trump Putin meeting) में गर्मजोशी झलक रही थी। पुतिन ने मुस्कुराते हुए अंग्रेजी में कहा, ‘next time in Moscow’ यानी अगली बार यह बैठक (Trump Putin meeting) रूस की राजधानी मॉस्को में होगी।
ट्रंप ने भी हल्के अंदाज में जवाब दिया, ‘That’s an interesting one’ यानी यह तो बहुत रोचक रहेगा। दोनों नेताओं का यह अंदाज तुरंत सुर्खियों में आ गया।
लेकिन इस दोस्ती के बीच पुतिन ने तीर चलाना नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि अगर ट्रंप राष्ट्रपति होते तो यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। यह सीधा वार जो बाइडेन (Joe Biden) पर था। ट्रंप ने भी मौका नहीं छोड़ा और कहा कि यह उनका युद्ध नहीं है, यह बाइडन का युद्ध है।
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जितनी अनोखी बैठक (Trump Putin meeting), उतनी अनोखी कूटनीति
आम तौर पर इस स्तर की बैठकों की महीनों तैयारी होती है, हर शब्द और हर बयान पहले से तय होता है। लेकिन ट्रंप का अंदाज अलग था। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि यह ‘feel-out meeting’ है, यानी एक तरह से माहौल भांपने की कोशिश।
वन-ऑन-वन बातचीत की योजना आखिरी समय में बदल दी गई। अमेरिकी पक्ष से विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) और दूत स्टीव विटकॉफ़ (Steve Witkoff) साथ बैठे, जबकि रूस की तरफ से सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) और यूरी उशाकोव (Yuri Ushakov) मौजूद रहे। यह बदलाव बताता है कि बैठक पारंपरिक कूटनीति से हटकर थी।
तेल और टैरिफ की राजनीति
बैठक से पहले ट्रंप ने इशारा दिया था कि वे उन देशों पर टैरिफ (Tariff on Russian Oil Buyers) लगा सकते हैं जो रूस से तेल खरीद रहे हैं। लेकिन बातचीत के बाद उन्होंने इसे टाल दिया। उनका कहना था कि भारत जैसे बड़े ग्राहकों पर दबाव डालने से रूस को झुकना पड़ा। हालांकि भारत ने तुरंत इस दावे को नकार दिया और अमेरिकी टैरिफ को अनुचित और गैर-जरूरी कहा।
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यूक्रेन की नाराजगी
Trump Putin meeting से सबसे असहज यूक्रेन रहा। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने साफ कहा कि उन्हें बातचीत से बाहर रखा गया। उन्होंने कहा कि युद्ध इसलिए जारी है क्योंकि मॉस्को से कोई संकेत नहीं मिल रहा कि वह इसे खत्म करना चाहता है।
अब आगे की तस्वीर क्या?
बैठक के अंत में ट्रंप ने कहा कि जल्द ही दोबारा मिलेंगे। पुतिन ने भी इशारा किया कि अगली मुलाकात (Trump Putin meeting) मॉस्को में हो सकती है यानी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। फिलहाल सौदा भले अधूरा रहा हो, लेकिन ट्रंप-पुतिन शिखर बैठक ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोर ली हैं।



