Vibhuwan Sankashti Chaturthi : हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा और उपवास करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। अधिक मास में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। चूंकि अधिक मास लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है, इसलिए यह विशेष संकष्टी चतुर्थी भी तीन साल में एक बार ही मनाई जाती है।
इस बार विभुवन संकष्टी चतुर्थी की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है। कई लोग इसे 3 जून को मान रहे हैं, जबकि कुछ 4 जून को। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस वर्ष विभुवन संकष्टी चतुर्थी कब मनाई जाएगी, चंद्रोदय का समय क्या रहेगा और पूजा की सही विधि क्या है (Vibhuwan Sankashti Chaturthi)।
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) कब है?
पंचांग के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 जून की रात 9 बजकर 22 मिनट पर होगा। यह तिथि 4 जून की रात 11 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।
संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। इसलिए जिस दिन चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में पड़ता है, उसी दिन व्रत रखा जाता है। इस वर्ष चंद्रोदय 3 जून को चतुर्थी तिथि के दौरान हो रहा है, इसलिए विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) का व्रत 3 जून को रखा जाएगा।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 3 जून, रात 9:22 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त : 4 जून, रात 11:31 बजे
- विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत : 3 जून
विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) का शुभ मुहूर्त
भगवान गणेश की पूजा के लिए दिनभर में कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध रहेंगे।
- सुबह के शुभ मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : सुबह 5:23 बजे से 7:07 बजे तक
अमृत चौघड़िया : सुबह 7:07 बजे से 8:51 बजे तक
शुभ चौघड़िया : सुबह 10:35 बजे से दोपहर 12:19 बजे तक
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- शाम के शुभ मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : शाम 5:31 बजे से 7:15 बजे तक
शुभ चौघड़िया : रात 8:31 बजे से 9:47 बजे तक
अमृत चौघड़िया : रात 9:47 बजे से 11:03 बजे तक
संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है। इस वर्ष चंद्रोदय का समय 3 जून की रात 10 बजकर 4 मिनट बताया गया है।
इस समय व्रती दूध और जल से चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन की शांति बढ़ती है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) पूजा विधि
इस वर्ष की विभुवन संकष्टी चतुर्थी और भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह बुधवार को पड़ रही है। बुधवार स्वयं भगवान गणेश का प्रिय दिन माना जाता है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को साफ करके लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करें।
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पूजा आरंभ करने से पहले गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद भगवान गणेश का पंचामृत से अभिषेक करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें। दूर्वा गणेशजी को अत्यंत प्रिय मानी जाती है।
इसके बाद भगवान को फल, फूल, पान और मोदक अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जप करें और श्रद्धापूर्वक आरती करें। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को पुनः गणेश पूजन करें। चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) पर इन गलतियों से बचें
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश पूजा में तुलसी के पत्तों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके स्थान पर दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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- संकष्टी चतुर्थी (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा माना जाता है। इसलिए चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करें।
- इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। सात्विक भोजन को प्राथमिकता दें।
- धार्मिक मान्यता है कि इस दिन (Vibhuwan Sankashti Chaturthi) झगड़ा, विवाद या बड़ों का अपमान करने से व्रत का शुभ फल कम हो जाता है। इसलिए शांत और संयमित व्यवहार रखें।
- संकष्टी चतुर्थी के दिन काले रंग के कपड़ों से परहेज करने की सलाह दी जाती है। स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
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