
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (Pitru Paksha) एक बेहद पावन समय माना जाता है। यह सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति हमारी कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का अवसर है। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अमावस्या तक चलने वाले इन पंद्रह दिनों में पितरों की आत्मा को शांति और तृप्ति देने के लिए श्राद्ध (Shraddh), तर्पण (Tarpan), पिंडदान (Pind Daan) और जल अर्पण (Jal Arpan) जैसे कर्म किए जाते हैं।
पितृ पक्ष 2025 कब है? (Pitru Paksha 2025 Date)
इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है। खास बात यह है कि उसी दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2025) भी लगेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शास्त्रों में वर्णन है कि पितृ पक्ष में श्रद्धा से जल अर्पित करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
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तर्पण और पिंडदान की सामग्री (Tarpan aur Pind Daan Samagri)
पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है – काले तिल, जौ या सत्तू, चावल (Rice), कुश घास, गंगाजल या शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद, फूल, तांबे या पीतल का पात्र, स्वच्छ वस्त्र।
स्नान और शुद्ध वस्त्र : श्राद्ध या जल अर्पण करने से पहले स्नान करना अनिवार्य है। स्नान से शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं। इसके बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनकर ही पूजा करें।
सूर्य की दिशा में जल अर्पण : जल अर्पण करते समय मुख पूर्व दिशा या उगते सूर्य की ओर होना चाहिए। तांबे का लोटा हाथ में लेकर उसे सिर के ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे मंत्र जाप करते हुए जल प्रवाहित करें।
मंत्र : ॐ पितृभ्यो नमः (Om Pitrubhyo Namah)
इस मंत्र का जाप पितृ दोष (Pitru Dosh) को दूर करता है और पितरों को संतुष्टि देता है।
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तांबे के लोटे का महत्व
पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे का लोटा सबसे पवित्र माना जाता है। यह जल को ऊर्जा और सकारात्मकता प्रदान करता है। जल अर्पण हमेशा शांत और एकांत स्थान पर करना चाहिए।
काले तिल और धूप का प्रयोग
जल अर्पण करते समय जल में काले तिल डालना शुभ होता है। यह पितरों के लिए अनुकूल माना जाता है। साथ ही, पूजा के समय धूप और दीपक जलाना वातावरण को शुद्ध करता है और पितरों को संतोष प्रदान करता है।
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पितृ पक्ष में दान का महत्व
श्राद्ध और तर्पण के बाद दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। दान में आप अन्न, फल, मिठाई, वस्त्र (Dhoti, Saree), दक्षिणा (Dakshina), गाय, छाता, जूते आदि दे सकते हैं। यह दान पितरों की तृप्ति के साथ-साथ पुण्य भी प्रदान करता है।
पितृ पक्ष में इन बातों का रखें ध्यान (Do’s and Don’ts in Pitru Paksha)
- तर्पण और पिंडदान हमेशा शुद्ध मन और शरीर से करें।
- पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर श्राद्ध करना उत्तम है, लेकिन घर पर भी किया जा सकता है।
- प्रत्येक पितर की पुण्यतिथि पर श्राद्ध करें, और यदि तिथि ज्ञात न हो तो सर्वपितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya) पर श्राद्ध करें।
- पितृ पक्ष में नए कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि करने से बचें।
- मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
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