
Uyghur Muslims of China : चीन के पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग में रहने वाले उइगर मुसलमान पिछले कई वर्षों से दुनिया की सबसे बड़ी मानवाधिकार बहसों में से एक के केंद्र में हैं। हाल ही में चीन द्वारा पारित किए गए नए कानून – एथनिक यूनिटी लॉ ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है। चीन का कहना है कि यह कानून राष्ट्रीय एकता और सामाजिक स्थिरता को मजबूत करेगा, जबकि आलोचकों का आरोप है कि इसके जरिए उइगरों की अलग सांस्कृतिक पहचान को और कमजोर किया जाएगा।
कौन हैं उइगर मुसलमान?
उइगर (Uyghur Muslims of China) एक तुर्किक मूल का मुस्लिम समुदाय है, जो मुख्य रूप से चीन के शिनजियांग क्षेत्र में रहता है। उनकी भाषा, संस्कृति, खानपान और धार्मिक परंपराएं चीन की बहुसंख्यक हान आबादी से काफी अलग हैं। सदियों से उइगरों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी है और शिनजियांग को अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि माना है।
चीन ने शिनजियांग को एक स्वायत्त क्षेत्र का दर्जा दिया हुआ है, लेकिन वर्षों से यहां केंद्र सरकार और स्थानीय आबादी के बीच तनाव बना रहा है।
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इस तरह शुरू हुआ दमन
चीन का कहना है कि 2000 और 2010 के दशक में शिनजियांग में कई हिंसक घटनाएं और आतंकी हमले हुए थे। सरकार के अनुसार, अलगाववाद, धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद से निपटने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी था (Uyghur Muslims of China)।
इसी तर्क के आधार पर बीजिंग ने शिनजियांग में एक व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया। सरकार का दावा है कि इन कदमों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता आई है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों और कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान धीरे-धीरे पूरे उइगर समाज को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था में बदल गया।
सबसे बड़ा विवाद उन डिटेंशन सेंटरों को लेकर है, जिन्हें चीन व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र कहता है। बताया जाता है कि लाखों उइगर और अन्य तुर्किक मुसलमान इन केंद्रों में भेजे गए (Uyghur Muslims of China)।
कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी मुकदमे के हिरासत में रखा गया, राजनीतिक विचारधारा की शिक्षा दी गई और धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया। हालांकि चीन इन आरोपों को गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताता है।
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दुनिया की सबसे बड़ी निगरानी
शिनजियांग को दुनिया के सबसे अधिक निगरानी वाले क्षेत्रों में से एक माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार यहां बड़े पैमाने पर फेस रिकग्निशन कैमरे लगाए गए, पुलिस चौकियां बनाई गईं और नागरिकों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखी गई। मोबाइल फोन की जांच, बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह और सार्वजनिक स्थानों पर लगातार निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं (Uyghur Muslims of China)।
शी जिनपिंग के दौर में मुस्लिमों के खिलाफ पॉलिसी और कड़ी हो गई। 2019 में पता चला कि शीर्ष स्तर से उइगरों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश आया था।
आलोचकों का आरोप है कि उइगर भाषा की जगह मंदारिन शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई मस्जिदों और धार्मिक स्थलों को बंद या परिवर्तित किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। धार्मिक कपड़ों, दाढ़ी रखने और कुछ धार्मिक प्रथाओं पर निगरानी की खबरें भी सामने आई हैं (Uyghur Muslims of China)।
उइगर समुदाय का कहना है कि उनकी भाषा, संस्कृति और धार्मिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर की जा रही है।
विवाद कमाई से भी जुड़ा
चीन इस बात के लिए बदनाम है कि वह अपने लोगों से कम मजदूरी पर जबरन ज्यादा काम कराता है। चीनी उत्पाद इसलिए सस्ते होते हैं। उइगरों का इलाका कपास, टेक्सटाइल और सोलर उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कई पश्चिमी देशों और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि कुछ उद्योगों में उइगरों से जबरन श्रम कराया जाता है (Uyghur Muslims of China)।
मुस्लिम दुनिया का दोहरा रवैया
गाजा के मुद्दे पर छाती पीटने वाले मुस्लिम देश उइगरों की दशा पर मौन हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है चीनी पैसा। चीन ने ज्यादातर मुस्लिम देशों को लोन दे रखा है। पाकिस्तान की तो इकॉनमी ही चीन के भरोसे चल रही है।
इसी वजह से मुस्लिम देश चीन के बारे में नहीं बोलते। तुर्की ने तो उन उइगरों को चीन के हवाले कर दिया, जो उसके यहां शरण मांगने पहुंचे थे।
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