
Dingo Fence : अगर आपसे पूछा जाए कि अंतरिक्ष से धरती पर कौन-सी चीजें दिखाई देती हैं, तो शायद आपका जवाब होगा चीन की महान दीवार या मिस्र के पिरामिड । लेकिन कम लोग जानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में बनी एक अनोखी दीवार भी अंतरिक्ष से दिखाई देती है।
यह दीवार न पत्थर की है और न ही ईंट की, बल्कि तारों की बनी एक विशाल फेंस (Dingo Fence) है, जो 5,600 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है। यह दुनिया की सबसे लंबी बाड़बंदी में से एक है और इसका मकसद है – डिंगो नामक जानवर को रोकना।
Dingo Fence क्यों बनाई गई?
इस फेंस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में हुई, जब ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में भेड़ पालन फल-फूल रहा था। लेकिन इन भेड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा था डिंगो (Dingo), जो ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा जंगली कुत्ता है। इन शिकारियों ने भेड़ों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
ऐसे में डिंगो फेंस (Dingo Fence) का निर्माण किया गया, ताकि इन खूंखार जानवरों को भेड़ों के इलाके से दूर रखा जा सके। आज भी इस फेंस के अंदर आने वाले डिंगो को तरह-तरह के तरीकों से मारा जाता है – जैसे जहर देना, जाल बिछाना या गोली चलाना।
एशिया से आया डिंगो
डिंगो (Dingo) ऑस्ट्रेलिया का मूल निवासी जंगली कुत्ता है, जो करीब 3,500-4,000 साल पहले एशिया से यहां पहुंचा। ये ऑस्ट्रेलिया के जंगलों, रेगिस्तानों और ग्रामीण इलाकों में पाए जाते हैं, खासकर फेंस (Dingo Fence) के बाहर वाले क्षेत्रों में। इनका रंग आमतौर पर सुनहरा-भूरा होता है, और ये बेहद चतुर और तेज शिकारी होते हैं।
डिंगो मुख्य रूप से कंगारू, छोटे जानवरों और कभी-कभी भेड़ों का शिकार करते हैं। भेड़ पालकों के लिए ये मुसीबत बन गए, क्योंकि झुंड में रहकर बड़ी संख्या में भेड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हालांकि डिंगो केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाते, इनके रहते पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) भी संतुलित रहता है।
दरअसल, डिंगो कंगारुओं (Kangaroo) को खाते हैं और कंगारू घास चरते हैं। जब डिंगो नहीं होते, तो कंगारुओं की संख्या बहुत बढ़ जाती है। नतीजा यह होता है कि घास और दूसरी वनस्पति खत्म होने लगती है, मिट्टी कमजोर हो जाती है और जमीन पर कटाव शुरू हो जाता है।
अंतरिक्ष से दिखने वाला फर्क
वैज्ञानिकों ने नासा (NASA) के सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों का अध्ययन किया और पाया कि डिंगो फेंस (Dingo Fence) के दोनों तरफ का नजारा बिलकुल अलग है। जहां डिंगो नहीं हैं, वहां घास कम और जमीन ज्यादा खाली दिखती है, क्योंकि कंगारू ज्यादा हैं और चराई भी ज्यादा हो रही है। दूसरी तरफ, जहां डिंगो मौजूद हैं, वहां घास ज्यादा और जमीन ज्यादा हरी-भरी नजर आती है। यह फर्क इतना बड़ा है कि अंतरिक्ष से भी साफ दिख जाता है।
डिंगो को हटाने का असर केवल घास पर ही नहीं पड़ा, बल्कि इसका असर पूरे रेगिस्तानी नजारे पर दिखाई दिया। 2018 के एक शोध में पाया गया कि वनस्पति की कमी से हवा का प्रवाह और रेत की गति तक बदल गई, जिससे पूरे मरुस्थल की बनावट ही ढल गई।
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2019 के अध्ययन ने दिखाया कि फेंस के बाहर मौजूद डिंगो बिल्लियों और लोमड़ियों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे छोटे जीव-जंतु सुरक्षित रहते हैं। लेकिन फेंस (Dingo Fence) के भीतर डिंगो की अनुपस्थिति ने पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित बना दिया।
यह स्थिति कुछ वैसी ही है जैसी अमेरिका के येलोस्टोन नेशनल पार्क (Yellowstone National Park) में वुल्फ हटाए जाने के बाद बनी थी। वहां 1920 के दशक में भेड़िए खत्म कर दिए गए थे। नतीजा यह हुआ कि हिरनों की संख्या बहुत बढ़ गई और पेड़ों-पौधों की नई कोंपलें पनप ही नहीं पाईं।
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