
RJD legal notice to bhojpuri singers : बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली अप्रत्याशित हार ने पूरे राजनीतिक माहौल को झकझोर दिया। आरजेडी को उम्मीद थी कि तेजस्वी यादव की युवा छवि और रोजगार–विकास वाले वादों से माहौल बदलेगा, लेकिन हुआ उल्टा। हार के बाद सबसे पहले जिस चीज पर उंगली उठी, वह थे चुनावी मौसम में चल रहे उत्तेजक, जातीय और हिंसक रंग वाले भोजपुरी गाने।
चुनाव नतीजे आते ही तेजस्वी यादव भले ही कैमरे के सामने न आए हों, लेकिन सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों से उन्होंने सबक जरूर लिया। परिणाम यह हुआ कि राजद ने बिहार और बाहर के कुल 32 गायकों को लीगल नोटिस भेज दिया, साथ में कड़ी चेतावनी भी (RJD legal notice to bhojpuri singers)।
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बिना अनुमति गाने बनाने पर कार्रवाई
राजद के सोशल मीडिया हैंडल ने यह जानकारी साझा की कि अब कोई भी गायक या अभिनेता पार्टी के झंडे, प्रतीक, या लालू–तेजस्वी के नाम का उपयोग करके गाना या रील नहीं बना सकेगा। जिन लोगों ने पिछले वर्षों में ऐसे गाने बनाए, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
पार्टी का कहना है कि यह सिर्फ इमेज का मामला नहीं है, बल्कि मानहानि और गलत संदेश फैलाने की चिंता भी है। राजद यह भी कह रही है कि अगर जवाब नहीं मिला तो डिफेमेशन केस दर्ज किया जाएगा (RJD legal notice to bhojpuri singers)।
गानों ने कैसे खड़ा किया विवाद?
चुनावी रैलियों में कुछ गाने तेजी से वायरल हुए थे। गानों में खुलकर यादव प्रभुत्व, हिंसा और दबदबे की भाषा का इस्तेमाल किया गया था। उदाहरण के तौर पर – ‘छाती में छह गोली मार देबे…’, ‘भइया की सरकार आई त’ हम रंगदार बन जइब…’, ‘सत्ता आऊ त’ कट्टा लेके घर से उठा लेब…’।
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ये गाने किसी राजनीतिक रणनीति के तहत नहीं बने थे। इन्हें सोशल मीडिया पर कुछ समर्थकों ने अपने हिसाब से तैयार किया और reels में खूब चलाया। लेकिन एनडीए ने इसे हथियार बना लिया और ‘जंगलराज’ नैरेटिव को बल मिला। (RJD legal notice to bhojpuri singers)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक रैली में इन गानों के बोल को उठाकर तेजस्वी और राजद पर तीखा हमला किया। तेजस्वी जहां नई पीढ़ी के लिए हर घर रोजगार और बेहतर कानून व्यवस्था का वादा कर रहे थे, वहीं ये गाने चुनावी चर्चा को फिर 1990–2005 की यादों की ओर घुमा ले गए।
क्या सच में इन गानों की वजह से वोट खिसके?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन गानों ने EBC यानी अतिपिछड़ा वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। बिहार की राजनीति में EBCs निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ये कुल आबादी का लगभग 36% हिस्सा हैं।
कई विश्लेषकों का कहना है कि गानों में यादव आक्रामकता दिखी। इससे गैर–यादव समुदायों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई। NDA ने इसे तुरंत उठा लिया और जंगलराज की याद दिलाई। इससे EBC वोट बड़े पैमाने पर NDA की तरफ शिफ्ट हो गए(RJD legal notice to bhojpuri singers)।
राजद ने 12 EBC उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ 2 जीत पाए। बाकी उम्मीदवार भारी अंतर से हार गए।
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तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में युवाओं, बेरोजगारी, शिक्षा और विकास को केंद्र में रखा था। कई रैलियों में अच्छी भीड़ उमड़ी, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए जातीय उन्माद वाले वीडियो और गाने पूरी कैंपेन लाइन को बिगाड़ते गए (RJD legal notice to bhojpuri singers)।
राजद प्रवक्ता प्रियंका भारती ने भी माना कि ऐसे गाने समाज के लिए खतरनाक होते हैं और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन विरोधी दलों ने इसे हार का ठीकरा गायकों पर फोड़ना बताया। JDU के नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि यात्रा के दौरान आपके कार्यकर्ता भी यही गाने बजा रहे थे। अब हार गए तो गायकों को दोष दे रहे हैं?
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